Page 144 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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श्री हररओम मतवारी, श्री राहुल मनलोत्स, श्री क ु नाल बुंदेला, श्री लोकश दुब,
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और श्री माखन मशंदे ने भी मरा पूरा सहयोग मकया। उनकी मदद स मने बहुत कम
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समय में ही सार प्रशासमनक कायष सीख मलए थे।
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मरा यह सफर बहुत शानदार रहा, लेमकन हर कहानी में एक मोड आता
है। जब श्री राजेंि खत्री जी का तबादला हुआ और उनक स्थान पर नए मजला
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मशक्षा अमधकारी आए, तो मर मलए पररमस्थमतयााँ बदल गई ं । मुझ ADPC क पद
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से हटाकर योजना शाखा में भज मदया गया। यह मेर मलए एक झटका था, लेमकन
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मने इस स्वीकार कर मलया और अपने नए काम म जुट गया।
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मर प्रशासमनक सफर का एक कडवा अध्याय तब शुऱू हुआ जब
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वतषमान मजला मशक्षा अमधकारी और उनकी टीम क एक व्यमि ने, मजनका नाम
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म गोपनीय रखना चाहता ह ाँ, मर मखलाफ एक र्ड्यंत्र रचा। उस व्यमि ने, मजसने
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मुझ और मर काम को कभी पसंद नहीं मकया, मेर ADPC कायषकाल की जााँच
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क मलए लोकमशक्षण संचनालय (DPI), भोपाल में एक मशकायत दजष करवा
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दी। यह खबर सुनत ही मर पैरों तल स ज़मीन मखसक गई। मुझ मवश्वास नहीं हो
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रहा था मक मेर काम को लेकर कोई मेर मखलार्फ मशकायत कर सकता है। मेर े
मदमाग में एक ही बात थी, "मैंने तो हमेशा ईमानदारी से काम मकया है।"
एक तरर्फ मन में डर था मक अब क्या होगा, मेरा कररयर और मेरी प्रमतष्ठा
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दााँव पर थी। दूसरी तरर्फ मर भीतर का मवश्वास मक मने कोई गलत काम नहीं
मकया है, मुझ महम्मत दे रहा था। मुझ लगा मक सच्चाई कभी हार नहीं सकती।
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वह व्यमि मुझ लगातार परशान कर रहा था और मुझ हर तरह स नीचा मदखाने
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की कोमशश कर रहा था। लमकन मुझ पता था मक मरा कम ही मरा सबस बडा
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हमथयार है।
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