Page 142 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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यह मर मलए एक बहुत ही मनराशाजनक क्षण था। मने मपछल एक साल
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म बहुत महनत की थी और इस पद पर काम करने का मुझ बहुत अनुभव हो गया
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था। मने अपने काम म कभी कोई कोताही नहीं की थी। मुझ लगा मक यह सब
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इसमलए हुआ क्योंमक वतमान मजला मशक्षा अमधकारी और उनकी टीम मुझ पसंद
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नहीं करती थी। मैं मनराश था, लेमकन मैंने हार नहीं मानी। मैंने योजना शाखा में
भी अपना काम पूरी लगन और ईमानदारी स मकया।
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आज जब म उस समय को याद करता ह ाँ, तो मुझ यह एहसास होता है
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मक हर अनुभव, चाहे वह अच्छा हो या बुरा, हम कुछ न कुछ मसखाता है। मर े
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ADPC क पद पर काम करने का समय भले ही छोटा था, लमकन इसने मुझ े
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बहुत कुछ मदया। इसने मुझ प्रशासमनक कायष का अनुभव मदया, मुझ नए लोगों
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से ममलवाया, और मुझ यह मसखाया मक जीवन म हर चीज़ स्थायी नहीं होती।
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मुझ खुशी है मक मने उस समय को ईमानदारी और लगन क साथ मजया।
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मैं इस आत्मकथा क माध्यम से उन सभी लोगों का आभार व्यि करना
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चाहता ह ाँ मजन्होंने मर इस सफर को यादगार बनाया। खासकर, श्री राजेंि खत्री
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जी का, मजन्होंने मुझ पर मवश्वास मकया और मुझ यह अवसर मदया। म श्री
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हररओम मतवारी, श्री राहुल मनलोत्स, श्री क ु नाल बुंदेला, श्री लोकश दुब, और
श्री माखन मशंदे जी का भी आभारी ह ाँ, मजन्होंने मुझ एक नए काम को सीखने म ें
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मदद की। उनका सहयोग मर मलए अनमोल था। मर जीवन की यह कहानी मुझ े
हमेशा याद मदलाती रहेगी मक ईमानदारी और मेहनत का फल कभी न कभी
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ममलता ही है, भल ही रास्ता मकतना भी मुमश्कल क्यों न हो।
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