Page 134 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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उदासी भी थी। मुझ उस टीम को छोडना था मजसक साथ मने बहुत कुछ सीखा
था।
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आज भी, जब म उन मदनों को याद करता ह ाँ, तो मेर चेहर पर एक
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मुस्कान आ जाती है। BAC क पद पर काम करने की सारी यादें आज भी मेर े
मदमाग में ताज़ा हैं। यह सफर मेर मलए मसर्फ एक नौकरी का बदलाव नहीं था,
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बमल्क यह मर व्यमित्व का भी एक महस्सा बन गया था। इस दौरान मुझ यह
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सीखने को ममला मक हर जगह अच्छ और बुर लोग होत हैं, और हमें हमेशा
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अच्छ लोगों से प्रेरणा लेनी चामहए।
मैं इस आत्मकथा क माध्यम से उन सभी लोगों का आभार व्यि करना
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चाहता ह ाँ मजन्होंने मर इस सफर को यादगार बनाया। खासकर, श्री कमल मसंह
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टांक का, मजन्होंने मुझ एक नया रास्ता मदखाया और मुझ एक मागदशक क ऱूप
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में सहारा मदया। जनपद मशक्षा कि में काम करने की वह छोटी सी अवमध मेर े
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मलए एक पाठशाला थी, मजसने मुझ जीवन क कुछ सबस बड सबक मसखाए।
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