Page 133 - आनंद से अनार तक
P. 133
आत्मकथा -आनंद स अनार तक
े
े
े
कमल मसंह जी क अलावा, मुझ कुछ और भी अच्छ सहकमी ममल,
े
े
मजन्होंने मेर छोटे से BAC कायषकाल को यादगार बना मदया। श्री धमेन्ि सेंगर,
े
श्री मनोज बेरागी, और श्री राजक ु मार उपाध्याय क साथ काम करना बहुत अच्छा
े
लगा। हम सब एक-दूसर का सम्मान करत थे और काम को टीम वक की तरह
ष
े
े
करते थे। हमार बीच कोई प्रमतस्पधाष नहीं थी, बमल्क एक-दूसर की मदद करने
े
े
की भावना थी।
े
लमकन मर इस छोट स सफर म कुछ चुनौमतयााँ भी थीं। जनपद मशक्षा
े
ें
े
े
े
े
ें
ैं
ै
े
ें
कि म कुछ अमधकारी थे मजनकी कायषशली स म बहुत परशान था। उनका
ें
े
व्यवहार और सोच लोगों क प्रमत अच्छी नहीं थी। उनकी भ्रिाचारी आदत मुझ े
े
े
े
े
बहुत मनराश करती थीं। मरी परवररश और मर मूल्य मुझे इस तरह क व्यवहार
को स्वीकार करने की इजाज़त नहीं देते थे। मैं हमेशा सच्चाई और ईमानदारी में
मवश्वास रखता था, और उनकी ये आदत मर मूल्यों क मखलाफ थीं। इन लोगों क
े
ें
े
े
े
े
े
े
कारण मेर मन में एक अजीब सी खटास थी, लमकन मुझ खुशी है मक यह सब
े
े
े
े
मेर अन्य अच्छ सहकममषयों क साथ मबताए गए समय और कमल मसंह जी क
मागषदशषन को प्रभामवत नहीं कर सका। मैं अपने काम पर ध्यान देता रहा और इन
ष
सब से कोई फक नहीं पडने मदया।
ैं
मेरा BAC का सफर बहुत छोटा था। मने 12 जनवरी, 2016 से 15
े
माचष, 2016 तक ही इस पद पर काम मकया। यह मेर जीवन का एक छोटा सा
लमकन बहुत ही महत्वपूण महस्सा था। 16 माचष, 2016 को, मुझ एक और खुशी
े
े
ष
े
ममली। मेरा प्रमोशन उच्च माध्यममक मशक्षक (अथषशास्त्) क पद पर देवास
मवकासखंड क शासकीय उच्चतर माध्यममक मवनॏयालय, पटाडी में हो गया। यह
े
मर मलए एक बडी उपलमब्ध थी। मुझ बहुत खुशी हुई, लेमकन मेर मदल में एक
े
े
े
े
123 | P a g e

