Page 169 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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                     डॉ. उमा गुप्ता ने मरा पूरा समथषन मकया। मर शोध म न कवल समस्याओं
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              का मवश्लर्ण था, बमल्क कुछ व्यावहाररक समाधान भी सुझाए गए थे। मने सुझाव
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              मदया था मक ग्रामीण क्षेत्रों क मलए स्थानीय भार्ा और जीवनशैली पर आधाररत
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              पाठ्यक्रम बनाया जाए। साथ ही, मशक्षकों क मलए मवशर् रमनंग प्रोग्राम शुऱू
              मकए जाएाँ, तामक वे ग्रामीणों की मानमसकता को समझ सक।
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                     मरी ररपोट की कुछ मसफाररशों को सरकार क मशक्षा मवभाग ने गंभीरता
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              से मलया। सबसे पहले, उन्होंने कुछ गााँवों म पायलट प्रोजक्ट शुऱू करने का मनणय
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              मलया, जहााँ स्थानीय मशक्षकों को मवशर् रमनंग दी गई और बच्चों क मलए खल-
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              खेल में सीखने की व्यवस्था की गई।
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                     इसका सबस सुखद पररणाम मने अपनी आखों स देखा। जब म 2018
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              में उन्हीं गााँवों में दोबारा गया, तो मने देखा मक स्कूल म बच्चों की संख्या पहल  े
              स बहुत ज़्यादा थी। बच्चे यूमनफॉम पहनकर आ रहे थे और उनक चेहरों पर एक
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              नई चमक थी। गााँव वालों ने मुझ देखकर कहा, "सर , आपने हमारा मवश्वास नहीं
              तोडा।" उस मदन मुझ अपनी पीएचडी की मडग्री स भी ज़्यादा ख़ुशी हुई।
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                     एक और बडा बदलाव यह था मक गााँवों क युवा अब खुद ही आग   े
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              आकर बच्चों को पढाने लगे थे। वे समझते थे मक मशक्षा ही उनक गााँव को गरीबी
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              क दलदल से बाहर मनकाल सकती है। मैंने अपनी आाँखों से देखा मक कसे मेर  े
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              शोध ने एक छोट स बदलाव की शुरुआत की थी, जो अब एक बड आंदोलन
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              का ऱूप ले रहा था।
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                     अध्याय 5: मनष्कर्ष और सम्मान - मेर श्रम का फल
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                     साल 2018 क मध्य में, मरी पीएचडी की थीमसस जमा हुई। मौमखक
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              परीक्षा (Viva) क दौरान, परीक्षक ने मर शोध की बहुत सराहना की। उन्होंने
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