Page 172 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

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              देत थे। मर मन म तुरंत यह ख्याल आया मक इस खुशी को उनक साथ बांटना
              सबसे ज़ऱूरी है।
                                                            े
                     मैंने मबना देर मकए फोन उठाया और एक-एक करक सबको कॉल मकया।
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               ैं
                                                                        ें
              मने उन्हें पूरी बात बताई और कहा मक हम सब ममलकर नई मदल्ली चलग। व  े
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              सभी मरी इस सफलता पर बहुत खुश हुए और उन्होंने तुरंत मर साथ चलने की
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              हामी भर दी।
                     अब अगला कदम था यात्रा की योजना बनाना। मैंने तत्काल ही 16
              मदसंबर 2018 क मलए देवास स नई मदल्ली क मलए रलव मटकट बुक कर दी।
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              मुझ ऐसा लगा मक यह मसफ एक रल यात्रा नहीं थी, बमल्क यह मेरी मेहनत की
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              जीत का जश्न मनाने वाली एक यात्रा थी।
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                     देवास स्टशन पर हमारी मुलाकात
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                     16 मदसंबर 2018 की शाम, देवास रलवे स्टशन पर एक अलग ही
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              रौनक थी। म स्टशन पर अपने भाई और दोस्तों का इंतजार कर रहा था। जस ही
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              वे सब एक-एक करक पहुाँचे, स्टशन का शांत माहौल हमार जोरदार ठहाकों स  े
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              गूंज उठा।
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                     हम सभी ने एक-दूसर को गल लगाकर बधाई दी। सुरि ने मुझस कहा,
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              "यह मसफआपकी पीएचडी की मडग्री नहीं है, यह हम सबकी मेहनत का फल है।
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              हमने भी आपक  साथ रात-रात भर जागकर तुम्हार शोध की बात सुनी हैं।"
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              उनकी  बात सुनकर मरी आख भर आई ं ।
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                     सोहन ने अपने मजामकया अंदाज़ म कहा, "अर, अब रोना बंद करो,
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              और चलो। मदल्ली म मडग्री लने जाना है। मुझ तो यह भी नहीं पता मक यह मडग्री
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              होती क्या है, पर इतना पता है मक आप  बहुत बड आदमी बन गए हो।" हम सब
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              उसकी बात पर खूब हाँस।
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