Page 177 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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आत्मा कथा का स्वमणषम पृष्ठ: मदल्ली में एक
गौरवशाली सुबह
अध्याय 1: गााँव की माटी से मदल्ली का िार
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मेरी कहानी 18 मदसंबर 2018 स एक मदन पहल शुऱू होती है, लेमकन
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इसकी जड मध्य प्रदेश क उस छोटे से गााँव की ममट्टी में हैं, जहााँ मेरी माताजी
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(श्रीमती कशर बाई ठाकुर) और बड भया (श्री सज्जन मसंह ठाकुर) ने मपताजी
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(श्री प्रह्लाद मसंह ठाकुर) क असाममयक मनधन क बाद, अपने त्याग और दृढ
इच्छाशमि से, मुझ 'आनंद मसंह ठाकुर' से 'डॉ. अनार मसंह ठाकुर' बनने का
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रास्ता मदखाया। मेरी यह पी.एच.डी. उपामध कवल एक शोध पररयोजना नहीं थी;
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यह मर गुरुओं क आशीवाषद, मेर पररवार क त्याग और मेर बचपन क सपने को
पूरा करने की दो साल की
'आत्म-खोज' की यात्रा थी,
जैसा मक मैंने अपनी
आत्मकथा में मलखा है।
17 मदसंबर 2018,
नई मदल्ली: मदल्ली की सदष
सुबह, 17 मदसंबर को, हम
राजधानी पहुाँच चुक थे। मर े
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साथ मेरा सबसे छोटा भाई
सुमेर मसंह ठाक ु र, जो मेरी हर
यात्रा का चुपचाप साक्षी रहा
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है, और मेर दो अमभन्न ममत्र—सुरन्ि सधव और सोहन क ुमार भैसमनया—थे।
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