Page 182 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                  1.  सवषश्री संदीप मारवाह (मीमडया और मसनेमा जगत की एक प्रमतमष्ठत

                     हस्ती)।
                  2.  डॉ. जी.सी. डका (मशक्षा और प्रौनॏयोमगकी क क्षेत्र से)।
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                  3.  डॉ. मोहम्मद अमीरी
                  4.  ममस बहर सदरी

                  5.  डॉ. जयंता राम चौधरी
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                     इन मदग्गजों ने बारी-बारी स मंच संभाला और मशक्षा क महत्व पर अपने
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              मवचार रखे। उनक शब्दों में एक भार था, जो हमें यह एहसास करा रहा था मक
              यह उपामध एक मज़म्मेदारी है।

                     दोपहर  12:00  बजे:  'डॉ.  अनार  मसंह  ठाक ु र'  का  आह्वान  पुरस्कार
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              मवतरण का क्रम शुऱू हुआ। एक-एक करक अवाडी क नाम पुकार जा रहे थे। हर
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              नाम क साथ तामलयों की गडगडाहट गूजती थी।
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                     और मफर वह क्षण आया। उदघोर्क की आवाज़ हॉल म गूजी: "और
              अब, हम आह्वान करते हैं, मध्य प्रदेश से पधार मविान, श्री डॉ. अनार मसंह ठाक ुर
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              को, मशक्षा क क्षत्र म उनक अभूतपूव नवाचार क मलए, पीएचडी की मानद
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              उपामध से सम्मामनत करने क मलए।"
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                     मरा मदल एक पल क मलए जस धडकना भूल गया। मने धीर स अपनी
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                                                                    े
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              सीट स उठना शुऱू मकया। मर पैर कााँप रहे थे, लमकन मरा मन शांत और कमित
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              था। मने मंच की ओर बढना शुऱू मकया।
                     मंच पर: म चांसलर और डॉक्टरल मोमनटररंग बोड क सदस्यों क सामने
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              खडा था। उनक चेहर पर एक सौम्य मुस्कान थी।
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