Page 184 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
नया चेहरा, एक नई कहानी, और एक नया नवाचार मंच पर आ रहा था। कु ल
60 व्यमियों को सम्मामनत होते देखना, एक सामूमहक गौरव की अनुभूमत थी।
अध्याय 7: एक नई शुरुआत
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समारोह क समापन क बाद, हॉल तामलयों की गडगडाहट स गूज उठा।
हम सभी 60 मविानों ने ममलकर एक समूह मचत्र मखंचवाया।
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इंमडया हैमबटट सटर क बाहर, हल्की धूप थी। मने और मर दोस्तों ने
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उपामध पत्र क साथ अनमगनत तस्वीर मखंचवाई ं । मर चेहर पर अब वह तनाव नहीं
था, बमल्क एक गहरी संतुमि थी।
सोहन ने कहा, "डॉक्टर साहब, आज हमारी मज़ंदगी का भी सबस े
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यादगार मदन है।" सुरन्ि ने सहममत जतात हुए कहा, "हम गव है मक हम तुम्हार े
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साथ इस पल क साक्षी बने।"
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सुमर, जो हमेशा कम बोलता था, ने अपना हाथ मर क ं धे पर रखा और
बस इतना कहा, "भैया, मााँ बहुत खुश होगी।"
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उस मदन, 18 मदसंबर 2018 को, इंमडया हैमबटट सटर म मुझ जो कागज़
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का टुकडा ममला, वह मेरी उपामध थी। लेमकन मेरी असली उपलमब्ध वह यात्रा
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थी, मजसे मैंने अपने पररवार, अपने गुरुओं और इन सच्चे दोस्तों क साथ तय
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मकया था। मुझ एहसास हुआ मक यह उपामध मर जीवन का अंत नहीं, बमल्क एक
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और मज़म्मदारी और एक नए सर्फर की शुरुआत थी—एक ऐसा सर्फर मजसमें मैं
अपने शोध को देश क मशक्षा क्षेत्र में वास्तमवकता में बदलकर, अपने गााँव की
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माटी का गौरव बढा सकता था।
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यह कहानी मरी आत्मकथा का वह स्वमणम पृष्ठ है, जो मुझ हमशा याद
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मदलाएगा मक सफलता की चमक अकले नहीं होती, बमल्क सच्चे ररश्तों क सहार े
से ही मनखरती है।
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