Page 179 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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मेर कपडों की मसलवट ठीक कीं, जैसे कोई पररवार का सदस्य अपने बच्चे को
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उसकी सबसे बडी परीक्षा क मलए तैयार करता है।
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सुबह 9:30 बजे: होटल स इंमडया हैमबटट सटर (IHC) क मलए टक्सी
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ली। मदल्ली की सुबह की भाग-दौड में भी, हमार अंदर एक ठहराव था। मरी
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नज़रों में, हर स्रीट लाइट, हर होमडग और हर गुज़रती कार हम एक भव्य मंच
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की ओर बढने का संकत दे रही थी।
सुबह 10:00 बजे (मनमित समय पर पहुाँचना): हम समारोह क मनधाषररत
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समय (11 बज) स एक घंटा पहल, ठीक 10:00 बजे, इंमडया हैमबटट सटर क
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िार पर खड थे। IHC की वास्तुकला, उसकी शांमत और मवमशिता हम एक
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अलग ही दुमनया म ल गई। गट पर पहुाँचत ही, मर अंदर का उत्साह एक शांत,
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गंभीर सम्मान म बदल गया।
हमने अंदर प्रवश मकया। हॉल क गमलयारों म अभी भी शांमत थी—वह
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शांमत जो मकसी बड आयोजन स पहल होती है। हमने देखा मक व्यवस्थापक दल
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अपनी अंमतम तयाररयों म जुटा हुआ था। इस जल्दी पहुाँचने का हम तुरंत लाभ
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ममला।
अध्याय 3: मविानों का ममलन और दीक्षा का वस्त्
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सुबह 10:05 बजे: चाय-नाश्ता और र्फलोमशप (Crucial Detail)
हम सीधे पंजीकरण काउंटर की ओर मनदेमशत मकया गया। वहााँ हमारी पहचान
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की पुमि हुई और एक अस्थायी बच प्रदान मकया गया। इसक तुरंत बाद, एक
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अलग कमर म हम अल्पाहार (चाय और नाश्ता) क मलए आमंमत्रत मकया गया।
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इस कमर में देश क कोने-कोने से आए अन्य 59 अवाडी (कुल 60)
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पहल स ही एकमत्रत होना शुऱू हो गए थे। म एक कोने म चाय की चुस्की लत े
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हुए अन्य मविानों को देख रहा था। कोई चेन्नई स आया था, कोई कोलकाता स,
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