Page 178 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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हमारी चार लोगों की टोली थी, जो छोटे शहर क उत्साह और बड शहर की
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भव्यता क ममश्रण को महसूस कर रही थी।
रलवे स्टशन से होटल तक का सफर, हमने अपने गााँव की कहामनयों
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और भमवष्य की उम्मीदों से भरा रखा। चेक-इन और थोडी देर क आराम क बाद,
मदल्ली की ऐमतहामसकता हम खींच लाई। हमने इंमडया गट की अमर ज्योमत क
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सामने खड होकर उस अदम्य भावना को महसूस मकया जो हम यहााँ तक लाई
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थी, लाल मकला और कुतुब मीनार की मवशालता ने हम हमार सपनों की ऊचाई
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का बोध कराया।
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शाम का मडनर कनॉट प्लेस क एक साधारण से रस्टोरट में, मकसी शाही
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दावत से कम नहीं था। यह मसर्फ भोजन नहीं था, यह वर्ों की दोस्ती, रातों की
पढाई और आगामी गौरव का जश्न था। मेरी उपामध, वास्तव में, हम चारों की
साझा उपलमब्ध थी। रात को जब मैं सोने गया, तो मेर मन में अगले मदन का
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पूवाषभ्यास चल रहा था। एक अजीब सी शांमत थी—वह शांमत जो एक योद्ा को
युद् स पहल ममलती है, मजसे पता है मक उसने अपना सवषश्रेष्ठ मदया है।
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अध्याय 2: मनयमत का आह्वान और इंमडया हैमबटट सटर
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18 मदसंबर 2018, सुबह 9:00 बजे: नींद शायद ही आई हो। अलामष
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बजने स पहल ही मरी आख खुल गई थी। कमर म रोशनी की एक हल्की मकरण
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थी, जो शायद मर अंदर क उत्साह का प्रतीक थी। यह वह मदन था, जब 'मशक्षा
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क क्षेत्र में नवाचार' पर मकए गए मेर शोध को औपचाररक पहचान ममलनी थी।
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हम चारों सुबह जल्दी तयार हो गए। एक तरफ म था, जो एक नई
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पहचान पाने वाला था, और दूसरी तरफ सुमर, सुरन्ि और सोहन थे, मजनकी
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आखों म मर मलए अथाह गव झलक रहा था। उन्होंने मुझ बार-बार चेक मकया,
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