Page 187 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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व्यवमस्थत बैरक—हर समनक का चेहरा आत्ममवश्वास और दृढता स भरा हुआ
था।
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सुरन्ि कुमार ने हम अपने क्वाटर म ठहराया। वहााँ का जीवन बहुत
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साधारण और अनुशामसत था। हमने महसूस मकया मक देश की सवा करने वाल े
इन जवानों का जीवन त्याग और समपषण से भरा होता है। हमारा स्वागत एक
साधारण चाय और पकौडों से मकया गया, लेमकन उस चाय में देशभमि और
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भाईचार का जो स्वाद था, वह मकसी फाइव-स्टार होटल क खाने से भी ज़्यादा
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अनमोल था।
हमने सुरन्ि कुमार क साथ बातचीत की। उसने हम अपनी ड्यूटी, अपने
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प्रमशक्षण और एक समनक क जीवन क रोज़मराष क संघर्ों क बार म बताया। उस
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बातचीत ने हमें अपनी पीएचडी की उपामध से भी ज़्यादा बडी उपलमब्ध का
एहसास कराया—वह उपलमब्ध थी देश की सीमाओं पर तनात इन वीर जवानों
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का त्याग। हमने महसूस मकया मक यमद हम अपने शोध और नवाचार पर काम
कर पा रहे हैं, तो वह इन्हीं जवानों क अटूट पहरदारी क कारण संभव है।
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अध्याय 3: स्वणष मंमदर: अध्यात्म और शांमत का कि
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19 मदसंबर 2018, सुबह 11:00 बजे: हमारा अगला पडाव था
अमृतसर का सबस पमवत्र स्थल—श्री हरमंमदर सामहब (स्वणष मंमदर)।
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जस ही हम स्वण मंमदर पररसर म पहुाँचे, बाहर का शोरगुल थम गया।
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पररसर म प्रवश करत ही हमने सबस पहल अपने मसर ढक और जूत उतार। मुख्य
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िार स अंदर जात ही, सामने का दृश्य अमवश्वसनीय था।
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पानी से भर अमृत सरोवर क बीचों-बीच जगमगाता हुआ स्वणष मंमदर,
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मानो सोने की एक नाव पानी पर तर रही हो। मंमदर क सोने की चमक, सुबह की
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