Page 185 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                                अमृतसर की आध्यामत्मक भूमम पर


                     अध्याय 1: मदल्ली स पंजाब की ओर—अधूरा उत्साह और नई मंमज़ल
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                     18 मदसंबर 2018, शाम 4:00 बजे, नई मदल्ली: इंमडया हैमबटट सटर
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              म दीक्षांत समारोह समाप्त हो चुका था। मर शरीर पर अभी भी उस औपचाररक
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              गाउन की महक और मन में पीएचडी की उपामध ममलने का गौरव ताज़ा था।
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              तस्वीर मखंच चुकी थीं, औपचाररक बधाईयााँ दी जा चुकी थीं, और अब हम,
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              'डॉ. अनार मसंह ठाकुर' और उनक तीन अमभन्न साथी—सुमेर मसंह ठाक ु र (मेरा
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              भाई), सुरन्ि सधव और सोहन क ु मार भैसमनया—अगल रोमांच क मलए तयार
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                     हमार मदल में अभी भी उस समारोह का उत्साह भरा था, लेमकन हमने
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              तय मकया था मक इस उपलमब्ध क बाद एक छोटी यात्रा तो बनती है। हमारी
              अगली मंमज़ल थी पंजाब का अमृतसर—एक ऐसा शहर जो शौयष, बमलदान और
              अध्यात्म का प्रतीक है।

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                     शाम 6:00 बजे, नई मदल्ली रलवे स्टशन: हम पंजाब क मलए रवाना
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              होने वाली रन म सवार हुए। रन की मखडकी स मदल्ली की भागती हुई रोशनी
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              हम मवदा कर रही थी। हमार मडब्ब म एक अजीब सी शांमत थी, जो मदनभर क
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              भारी भावनात्मक और औपचाररक अनुभवों क बाद आई थी।
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                     हमारी इस यात्रा का मुख्य कारण था मर दोस्त सोहन भैसामनया  क
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              छोटा भाई, सुरन्ि क ु मार, जो भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहा था और उस
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              समय अमृतसर कटोनमट (कट) म तनात था। हमने तय मकया था मक हम न
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              कवल अमृतसर घूमग, बमल्क सना क जीवन को करीब स देखग और सुरन्ि
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              कुमार स ममलग।
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