Page 186 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

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                     रन की रात, हमने अपनी सीट पर बैठ-बैठ अनमगनत बातें कीं। हमने
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                                                       े
              समारोह क हर पल को दोबारा मजया, अमतमथयों क भार्णों को याद मकया, और
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                                                     े
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              उस यूमनफॉम म खींची गई अपनी तस्वीरों पर हाँस। यह रात, सफलता क बाद की
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                                                                     े
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              सुकून भरी रात थी, जो चार दोस्तों क बीच की अटूट दोस्ती को और मज़बूत
              कर रही थी।
                     अध्याय 2: सेना क कट में एक साधारण अमतमथ
                                      ैं
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                     19 मदसंबर 2018, सुबह 7:00 बजे, अमृतसर रलवे स्टशन: पंजाब की
                                                                े
                                                                 सदष, धुंध भरी
                                                                 सुबह ने हमारा
                                                                 स्वागत मकया।
                                                                 स्टशन    पर
                                                                   े
                                                                 पहुाँचत ही, हमें
                                                                      े
                                                                 वहााँ की ममट्टी

                                                                 की  महक  में
                                                                 एक अलग ही

              ऊजाष महसूस हुई—यह शौयष और बमलदान की भूमम थी।
                     स्टशन से बाहर मनकलते ही, हमने देखा मक सुरन्ि क ु मार (सेना का
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                                                            े
                                                           ें
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              जवान) हमारा इंतज़ार कर रहा था। उस वदी म देखकर हम जो गव महसूस हुआ,
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              उस शब्दों म बयााँ करना मुमश्कल है। मरा दोस्त सुरन्ि सधव अपने भाई को गल  े
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                                                          ैं
              लगाकर बहुत खुश हुआ।
                     सुरन्ि कुमार हम सीधे अमृतसर सना कट ले गया। कटोनमेंट में प्रवेश
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                                  ें
              करना ही अपने आप म एक अमवस्मरणीय अनुभव था। ऊची दीवार, सख्त
                                                              ाँ
              सुरक्षा,  और  हर  जगह  अनुशासन  का  माहौल।  चारों  तरर्फ  हररयाली  और
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