Page 171 - आनंद से अनार तक
P. 171

आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
                                                 े

                            "आमंत्रण: पीएचडी अवाड सरमनी
                                                        ष
                                                          े
                                                           े
                            मनमंत्रण का ईमेल और खुशी का सलाब
                                                        ै
                     12 मदसंबर 2018 की शाम थी। म अपने लपटॉप पर कुछ काम कर रहा
                                                ैं
                                                       ै
                        े
              था, तभी मेर ईमेल इनबॉक्स में एक नया मेल आया। ईमेल का शीर्षक था
                                                       े
              "आमंत्रण: पीएचडी अवाड सरमनी, नई मदल्ली।" मेर मदल की धडकनें अचानक
                                    ष
                                      े
                                      े
                         ैं
                                         े
                                       े
                                े
               े
              तज हो गई ं । मने कांपत हाथों स मल खोला।
                     मल  म  मलखा  था  मक  मुझ  18  मदसंबर  2018  को  नई  मदल्ली  में
                       े
                                            े
                           ें
                                              े
                                            ष
                                                    े
              आयोमजत होने वाली पीएचडी अवाड सरमनी क मलए आमंमत्रत मकया गया था।
                                               े
                                                                      े
                                                                   े
                                                            वहााँ  मुझ  मरी  मडग्री
                                                            औपचाररक  ऱूप  से
                                                            प्रदान  की  जाएगी।
                                                            यह  खबर  मेर  मलए
                                                                       े
                                                             े
                                                            कवल  एक  सूचना
                                                            नहीं थी, बमल्क मेरी
                                                            दो साल की मेहनत,
                                                  ें
                                         े
                                                             ाँ
                                                         े
              संघर् और त्याग का प्रमाण थी। मरी आखों म खुशी क आसू आ गए।
                                              ाँ
                  ष
                       ैं
                     मने तुरंत अपनी गाइड, डॉ. उमा गुप्ता को र्फोन मकया और उन्हें यह
              खुशखबरी दी। उन्होंने कहा, "मने तुमस कहा था मक तुम्हारी महनत रंग लाएगी।
                                             े
                                                               े
                                       ैं
                                          े
              तुम्हें बधाई!" उनकी बात सुनकर मरी खुशी दोगुनी हो गई।
                                                               े
                                       े
                                         े
                     लमकन यह खुशी अकल मनाने वाली नहीं थी। मुझ पता था मक इस
                       े
                                                                  ें
                      े
                                                          े
                                                                          ैं
              यात्रा में मेर साथ कौन था। मेर भाई, सुमर मसंह ठाकुर, मेर दोस्त, सुरि मसंह सधव
                                             े
                                     े
                                                                ें
              और सोहन कुमार भसामनया—ये वो लोग थे मजन्होंने मर संघर् म मरा साथ मदया
                                                                  े
                                                          े
                              ै
                                                         े
                                                               ष
                                                               े
              था। जब मैं शोध क मलए गााँव-गााँव भटकता था, तो ये लोग मुझ मानमसक सहारा
                            े
              161 | P a g e
   166   167   168   169   170   171   172   173   174   175   176