Page 18 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

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              सबक मलए समान था। लोग कहत हैं मक वे बहुत ही समझदार और मववेकशील
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              थे। एक बार की बात है, गााँव क दो भाइयों में ज़मीन क एक छोट स टुकड को
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              लेकर झगडा हो गया। दोनों भाई झगडत-झगडत मेर मपता क पास पहुाँचे। उन्होंने
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              दोनों की बात ध्यान स सुनी। उन्होंने कोई जल्दबाज़ी नहीं की। अगल मदन सुबह,
              वे अपने घोड पर सवार होकर सीधे उस ज़मीन पर गए। उन्होंने खुद ज़मीन की
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              नाप-जोख की, और वहााँ क लोगों स भी पूछा। अपनी आाँखों स सब क ु छ देखने
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              क बाद, उन्होंने दोनों भाइयों क बीच ऐसा न्याय मकया मक दोनों भाई एक-दूसर  े
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              को गले लगाकर मुस्क ु राने लगे। उनका न्याय कवल फसला नहीं था, बमल्क यह
              मदल से मदया गया फसला था।
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                  मेर मपता क जीवन का एक और पहलू था—उनका गरीबों क प्रमत गहरा
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              प्रेम। वे मसर्फ नाम क मुमखया नहीं थे, बमल्क वे सच में गााँव क हर व्यमि की
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              परवाह करते थे। एक बार, गााँव में एक गरीब मकसान का पूरा खेत बाररश में बह
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              गया था। वह मकसान बहुत परशान था। उसक पास खाने क मलए क ु छ नहीं था।
              मेर मपता ने उसकी परशानी को समझा। उन्होंने तुरंत गााँव क लोगों को इकठॎठा
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              मकया और उस मकसान की मदद क मलए धन और अनाज इकठॎठा मकया। उन्होंने
              यह सुमनमित मकया मक कोई भी गरीब व्यमि भूखा न सोए। वे कहत थे, "अगर
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              मेर रहत हुए मेर गााँव में कोई व्यमि भूखा सोएगा, तो मेरा पटल होना बेकार है।"
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              उनक इन मवचारों ने उन्हें पूर गााँव का सच्चा मुमखया बना मदया था।
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                  दुभाषग्य स, मेर पास अपने मपता क साथ मबताए गए समय की बहुत कम यादें
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              हैं। मैं इतना छोटा था मक मुझे उनका स्पशष, उनकी आवाज़ और उनकी मुस्कान
              भी ठीक स याद नहीं है। मेरी सबस गहरी यादें वे हैं जो मुझे लोगों ने बताई ं । मेर  े
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              बड भाई और मेरी माताजी ने मुझे हमेशा यह एहसास मदलाया मक मेर मपता एक
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              महान व्यमि थे। उन्होंने मुझे बताया मक मेर मपता ने अपने जीवन को ईमानदारी,
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