Page 23 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                                 बचपन का वह भयानक हादसा:


                                 एक सबक जो हमेशा याद रहेगा

                                       (8 अगस्त, 1979)

                                                    े
                     हर बचपन की कहानी म शरारत और खलकूद क मकस्स होत हैं, लेमकन
                                        ें
                                                                 े
                                                           े
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              मेर बचपन में एक ऐसी घटना घटी मजसने न कवल हमार खेल को एक भयानक
                                                          े
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                                       े
              हादसे में बदल मदया, बमल्क पूर पररवार को महलाकर रख मदया। उस मदन ने हम  ें
              यह मसखाया मक जीवन मकतना अनमोल है और हमारी छोटी-सी गलती का
              मकतना बडा पररणाम हो सकता है। यह बात तब की है जब मैं आठ साल का था
              और कक्षा तीसरी में पढता था।
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                     हमारा गााँव म एक पुरानी हवली थी, जहााँ हम सभी भाई-बहन एक साथ
                                ें
                                                      े
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              रहते थे। हवेली क एक बड कमर में हम सभी लडक ममलकर पढाई करते थे। उस
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              कमर में मैं, मेरा छोटा भाई सुमेर मसंह, मुझस बड भाई क ु मेर मसंह और हमार चचेर  े
                                                े
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                                                              भाई     बजेमसंह
                                                              शाममल  थे।  हम
                                                              सबकी  मदनचयाष
                                                              तय  थी  मक  रोज़
                                                              शाम को हम सब

                                                              एक साथ बैठकर
                                                                      ें
                                                              पढाई करगे। हमार  े
                                                                         े
                                                              मलए  यह  कवल
              पढाई नहीं, बमल्क एक साथ मबताया गया यादगार समय था। हम पढते-पढते





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