Page 27 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

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                     इसी  तरह,  मेर  बड  भैया,  श्री  सज्जन  मसंह  ठाक ु र,  ने  मपता  की
                                                                  े
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              अनुपमस्थमत म एक अमभभावक की भूममका मनभाई। उन्होंने उम्र स कहीं ज़्यादा
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              पररपक्वता मदखाई। उन्होंने न कवल मुझ भावनात्मक सहारा मदया, बमल्क एक
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              दोस्त, एक गुरु और एक मागदशक की तरह मरा हाथ पकडा। उन्होंने मर सपनों
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              को अपना सपना मान मलया और यह सुमनमित मकया मक मर जीवन म कोई कमी
              न रहे। भया का प्यार और संरक्षण मर मलए वह मजबूत सहारा था, मजसकी मुझ  े
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              सबस ज़्यादा ज़ऱूरत थी। उन्होंने अपने महस्स की खुमशयााँ और सपने भी हमार  े
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              मलए कुबाषन कर मदए।
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                     यह मरी माता और बड भया का ही अटूट प्रेम और बमलदान था, मजसने
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              मर जीवन को संवारा। मर व्यमित्व और मरी सफलता की हर नींव म उनका ही
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              योगदान है। उन्होंने मुझ कवल बडा नहीं मकया, बमल्क मुझ एक इंसान क ऱूप म  ें
              गढा। उनकी महम्मत, त्याग और मनस्वाथष प्रेम ही मेरी सबसे बडी प्रेरणा है और
              आज भी है। यह लेख मसफ मेरी कहानी नहीं, बमल्क उन दो महान व्यमियों की
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              कहानी है, मजन्होंने मुझ मसखाया मक पररवार क मलए मकया गया त्याग, मकसी
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              भी उपलमब्ध से बडा होता है।


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