Page 25 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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              था। हमें बैलगाडी से ले जाया गया। उस समय बैलगाडी ही एक मात्र साधन था,

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              और हम लगा जस हम मज़ंदगी और मौत क बीच झूल रहे हों।
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                     उस हादस ने हमार पूर पररवार को महलाकर रख मदया। हमारी माताजी
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              और अन्य बड-बुजुगों की आखों म डर और मचंता थी। उनक मलए यह एक बुरा
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              सपना था जो सच हो गया था। भगवान की कृपा स, हम सब उस हादसे से बच
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              गए, लमकन उसका ददष और उसकी यादें आज भी हमार मन म मज़ंदा हैं। कुमर
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              मसंह और बजमसंह को चोटों क कारण कई महीनों तक इलाज कराना पडा। इस
              घटना ने हम सबको यह मसखाया मक लापरवाही का मकतना बडा पररणाम हो
              सकता है।
                     आज जब म उस मदन को याद करता ह ाँ, तो मुझ यह एहसास होता है
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              मक वह हादसा मर जीवन का सबस बडा सबक था। इसने मुझ मसखाया मक
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              मजंदगी मकतनी अनमोल है और हम हर पल सावधानी स जीना चामहए। आज
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              भी, जब मैं और मेर भाई एक साथ बैठते हैं, तो हम उस मदन को याद करते हैं
              और भगवान का शुमक्रया अदा करत हैं मक हम सब सुरमक्षत बच गए। वह हादसा
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              हमार बीच क ररश्त को और भी मज़बूत बना गया।
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