Page 31 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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                     यह खबर सुनकर पूर घर म खुशी की लहर दौड गई। मर माता-मपता की
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              आखों म गव क आसू थे। मर मपता, जो खेतों में मेहनत कर हमारा भमवष्य गढ
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              रहे थे, उनकी छाती चौडी हो गई। मरी माता ने स्नेह स मुझ गल लगा मलया। यह
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              कवल मेरी सफलता नहीं थी, बमल्क उनक सपनों की जीत थी। इस सफलता ने
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              गााँव म भी मुझ एक नई पहचान दी। लोग मर घर आकर मर माता-भाइयो  को
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              बधाई दे रहे थे।
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                     यह खुशी तब और बढ गई जब मुझ मेररट छात्रवृमत्त (scholarship)
              क मलए चुना गया। यह मर मलए एक बहुत बडा सम्मान था। उस समय एक
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              मकसान पररवार क बच्चे क मलए यह छात्रवृमत्त मकसी वरदान स कम नहीं थी।
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              इसने मुझ न कवल आमथषक सहायता प्रदान की, बमल्क यह मवश्वास भी मदलाया
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              मक अगर म महनत करता रह ाँगा, तो सफलता मर कदम चूमगी। उस छात्रवृमत्त ने
              मेर आगे की मशक्षा का मागष प्रशस्त मकया।
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                     आठवीं कक्षा की वह सफलता मर जीवन का एक टमनिंग पॉइंट थी।
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              इसने मुझ कडी महनत का फल, सम्मान का महत्व और आत्ममवश्वास का पाठ
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              पढाया। यह अनुभव मर मन म हमशा एक मीठी याद की तरह रहेगा और मुझ  े
              हमेशा आगे बढने क मलए प्रेररत करता रहेगा।
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