Page 35 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
• श्री भगवान मसंह चौहान सर: चौहान सर का पढाने का तरीका इतना
सरल और स्पि था मक गमणत जैसे कमठन मवर्य भी आसान लगने
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लगते थे। वह मसफ मशक्षक नहीं, बमल्क हमार ममत्र और मागषदशषक भी
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थे। उनकी प्रेरणा स ही मर अंदर मवर्यों को गहराई स समझने की ललक
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पैदा हुई।
• श्री सक्सेना जी: सक्सना सर ने हम मवज्ञान की दुमनया स पररमचत
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कराया। उनकी कक्षा म हर प्रयोग और हर मसद्ांत एक कहानी की तरह
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लगता था। उन्होंने मुझ मसखाया मक मवज्ञान कवल मकताबों म नहीं,
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बमल्क हमार चारों ओर मौजूद है। उनका व्यावहाररक ज्ञान और धैयष
अद्भुत था।
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• पाटीदार सर: पाटीदार सर का अनुशासन और मागदशन मर मलए बहुत
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महत्वपूण रहा। उन्होंने हम मसखाया मक जीवन म सफलता पाने क मलए
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मसफ बुमद् ही नहीं, बमल्क कडी मेहनत और लगन भी ज़ऱूरी है। वह
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हमेशा हमें प्रोत्सामहत करते थे मक हम अपने लक्ष्यों पर कमित रहें और
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कभी हार न मानें।
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टोंक खुदष म मबताए ये साल कवल पढाई क साल नहीं थे, बमल्क वे मेर े
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व्यमित्व क मनमाषण क साल थे। इन मशक्षकों क आशीवाषद और मेर िारा की गई
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महनत ने मुझ एक मजबूत आधार मदया, मजस पर मैं आगे की मशक्षा और जीवन
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की इमारत खडी कर सका। यह मेर जीवन का वह अध्याय था, मजसने मुझ एक
मवनॏयाथी स एक मजम्मदार और महनती इंसान बनने की राह मदखाई।
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