Page 37 - आनंद से अनार तक
P. 37

आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
                                                 े

                                े
                 े
              होत थे। हम भगवान स प्राथषना करत थे मक रमू दा हम मबना मकराया मदए ही बठा
                                                                          ै
                                                       ें
                                          े
              लें।
                                                                  े
                                         े
                     एक मदन, बाररश बहुत तज़ हुई थी और रास्ता कीचड स पूरी तरह भर
                                                 े
              गया था। म और मर कुछ दोस्त स्कूल जाने क मलए दूध वाहन म बठ गए। आज
                              े
                             े
                                                                 ें
                                                                   ै
                       ैं
                                                              े
                    े
              भी मुझ वह मदन अच्छी तरह याद है, जब हम सब एक-दूसर की तरर्फ देख रहे
              थे, क्योंमक हमार पास मकराया देने क मलए पैस नहीं थे। हम रमू दा स कुछ कहत,
                                                                   े
                                                                            े
                           े
                                          े
                                                  े
              इससे पहले ही उन्होंने हमें अमोना क पास, जो टोंक खुदष स कुछ दूर था, घने
                                            े
                                                              े
              कीचड में ही उतार मदया। उन्होंने हमसे कहा, "मकराया नहीं है, तो गाडी में बैठने
              का कोई हक़ नहीं है।" उनकी बात सुनकर हमारा मदल टूट गया। हम वहााँ बीच
                                       ष
              रास्ते में खड थे, चारों ओर मसर्फ कीचड और दलदल था।
                        े
                     हम सब बहुत उदास और परशान थे। हमार स्कूल का समय हो चुका
                                            े
                                                        े
                                                                   े
                                                       ै
              था, और हमें यह भी नहीं पता था मक हम यहााँ से कसे जाएाँगे। हमार पैर कीचड
                                                                       ें
               ें
                                             े
              म धाँस रहे थे और हम बहुत मुमश्कल स चल पा रहे थे। हम उस कीचड म चलत  े
              रहे, मगरते रहे, और महम्मत करक आग बढत रहे। धूप भी बहुत तज़ थी और
                                                   े
                                                                    े
                                              े
                                         े
              प्यास स गला सूख रहा था। हम याद है मक जब हम टोंक खुदष पहुाँचे, तो दोपहर
                                       ें
                    े
               े
              क 3 बज चुक थे। हम स्कूल तो पहुाँच गए, लमकन उस मदन हमारी हालत बहुत
                         े
                                                  े
              खराब थी। हमारा शरीर थक चुका था और मन बहुत मनराश था।
                     वह घटना हमार मलए एक बहुत बडा सबक थी। उस मदन हम सबने यह
                                 े
              तय मकया मक हम अब रोज़ाना इतना संघर् नहीं कर सकत। हम अपने पररवार स  े
                                                           े
                                               ष
                                                  े
                                                                      ें
              दूर रहकर भी पढाई कर सकत हैं। उस मदन क बाद, हमने टोंक खुदष म ही एक
                                      े
                                    ै
              मकराये का कमरा लेने का फसला मकया, तामक हम रोज़ाना यह मुमश्कल सफर
                                                       ें
                        े
              न करना पड।
              27 | P a g e
   32   33   34   35   36   37   38   39   40   41   42