Page 34 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

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                                                                       े
                          हाई एवं हायर सेकडरी मशक्षा: टोंक खुदष क
                                      यादगार साल

                     आठवीं  कक्षा  म  ममली  सफलता  ने  मर  अंदर  एक  नई  ऊजाष  और
                                   ें
                                                      े
                                                     े
              आत्ममवश्वास भर मदया था। अब समय आ गया था प्राथममक और माध्यममक
              मशक्षा की दुमनया स बाहर मनकलकर, उच्च मशक्षा क मलए एक नए पडाव की
                                                        े
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                                                                         ें
              ओर बढने का। यह पडाव था टोंक खुदष, जहााँ मने अपनी हाई एवं हायर सकडरी
                                                                        े
                                                   ैं
              मशक्षा की शुरुआत की।
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                                                         े
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                     गााँव क स्कूल क बाद, टोंक खुदष का माहौल मर मलए एक नया अनुभव
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              था। यहााँ मने अपने भमवष्य क मलए एक महत्वपूण मनणय मलया और गमणत-
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                       ैं
                                                                      े
              मवज्ञान संकाय को चुना। मवज्ञान क रहस्यों को समझना और गमणत क जमटल
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              सूत्रों को हल करना मर मलए एक रोमांचक चुनौती थी। साल 1990 में हाई स्क ू ल
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                                े
              की परीक्षा और 1992 में हायर सेकडरी की परीक्षा उत्तीणष करना मेर जीवन की
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                                          ें
                                                           एक  बडी  उपलमब्ध
                                                                        े
                                                           थी, मजसने मुझ आग  े
                                                                       े
                                                           की  पढाई  क  मलए
                                                           तैयार मकया।
                                                                  इस  दौर  में
                                                              े
                                                           मुझ  कुछ  ऐस  महान
                                                                       े
                                                           मशक्षकों  का  सामनध्य
                                                                    े
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              ममला, मजनका मर जीवन पर गहरा असर पडा। इन मशक्षकों ने मुझ कवल मवर्य
              का ज्ञान नहीं मदया, बमल्क जीवन जीने का सही तरीका भी मसखाया।


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