Page 19 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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              साहस और प्रेम स मजया। उन्होंने मुझे हमेशा प्रेररत मकया मक मुझे भी उनक जैसा
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              बनना चामहए।
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                  मेर जीवन में उनक जाने क बाद बहुत सी चुनौमतयााँ आई ं । मेर बड भाई ने
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                                                                  े
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              मेरी मपता की जगह ली और पूर पररवार की मज़म्मेदारी संभाली। लमकन मेर मपता
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              की परछाई हमेशा हमार साथ रही। उनका नाम ही हमार मलए महम्मत का स्रोत
              था। जब भी कोई मुमश्कल आती थी, तो हमें यह एहसास होता था मक हमार  े
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              मपता ने इसस भी बडी मुमश्कलों का सामना मकया है। उनकी बहादुरी और साहस
              ने मुझे जीवन में आगे बढने की प्रेरणा दी।
                  आज जब मैं एक उनॏयमी, एक मशक्षक और एक सामामजक कायषकताष ह ाँ, तो
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              मुझे यह एहसास होता है मक मेर अंदर जो भी अच्छा है, वह मेर मपता की वजह
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              से है। उनका न्याय, उनका साहस, और उनका समाज क प्रमत प्रेम मेर जीवन क
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              हर फसले को प्रभामवत करता है। मेरा ममशन, मेरा मशवम इंस्टीट्यूट, मेरी पमत्रका
              'सैंधव प्रभात' और मेर सभी सामामजक कायष—यह सब मेर मपता की मवरासत
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              हैं। वे भले ही मेर साथ नहीं थे, लेमकन उनक मवचार और उनकी आत्मा हमेशा
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              मेर साथ थी। उनकी बहादुरी और उनका साहस मेरी रग-रग में बसा है।
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                  मेर मपता श्री प्रहलाद मसंह पटल, आप मसर्फ एक नाम नहीं, बमल्क एक
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              प्रेरणा हैं। आपने मुझे वह सब मदया जो एक मपता अपने बच्चे को दे सकता है—
              एक महान मवरासत, एक सम्मानजनक नाम, और एक ऐसा जीवन जो दूसरों क
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              मलए मजया जाए। मैं आपका ऋणी ह ाँ।

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