Page 193 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                                   'वह' असाधारण दृश्य—गााँव का नज़ारा

                     21 मदसंबर 2018, दोपहर, बरदु गााँव क पास: जैसे ही हमारी गाडी (जो
                                                    े
              हमने नज़दीकी स्टशन से मकराए पर ली थी) गााँव की सीमा में प्रवेश करने वाली
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              सडक पर मुडी, हमने दूर स ही कुछ असामान्य  देखा।
                     गााँव का मुख्य माग, जो सामान्यतुः शांत और धूल भरा रहता था, आज
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              बैंड बाजे की तज़ धुन स गूज रहा था। मने सोचा, शायद मकसी की शादी या कोई
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              अन्य समारोह होगा। पर जैसे-जस हम नज़दीक पहुाँचे, वह दृश्य मेरी कल्पना से
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              मबलक ु ल हट क  था।
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                     सडक क दोनों ओर, गााँव क पुरुर्, ममहलाएाँ और बच्चे कतार में खड  े
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              थे। सभी क चेहर पर एक चमक थी, आखों म एक उत्सुकता। मने ध्यान स देखा।
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              भीड क बीचों-बीच, मेर सबसे छोटे भाई क ु मेर मसंह और अन्य भाई मवक्रम मसंह
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              तथा गजराज मसंह खड होकर लोगों को व्यवमस्थत कर रहे थे।
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                     मेरी गाडी रुकी। जैसे ही मैं दरवाज़ा खोलकर नीचे उतरा, बैंड बाजे की
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              आवाज़ अचानक से और तेज़ हो गई। ढोल, ताशे   की आवाज़ ने पूर वातावरण
              को उल्लास से भर मदया।
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                     मेर बड भाई सज्जन मसंह ठाक ु र और मानमसंह ठाक ु र सीधे मेरी तरर्फ
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              आए। उनकी आाँखों में मेर मलए मसर्फ गवष नहीं था, बमल्क एक गहरा, शांत प्रेम
              था। मैंने उन्हें गले लगाने क मलए हाथ बढाए, लेमकन उन्होंने रुकने का इशारा
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              मकया।
                                        भाइयों का समपषण—योजना का खुलासा
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                     सज्जन मसंह ने अपने मवशाल, मजबूत हाथों स मरी पीठ थपथपाई और
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              एक गहरी मुस्कान क साथ कहा, "डॉक्टर साहब, आप हमारी उम्मीद हो। इतनी

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