Page 198 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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आत्मा कथा का माममक अध्याय: आधारस्तंभ का ढहना
(यह कहानी मेरी आत्मा कथा का सबसे माममषक, सबसे गहरा और
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सबस दुखद अध्याय है। यह उस अटूट नींव क ढह जाने की कहानी है, मजस पर
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मेरी और मेर भाइयों-बहनों की पूरी मज़ंदगी खडी थी—मरी पूजनीय माताजी,
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श्रीमती कशर बाई ठाक ु र का स्वगषवास।
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यह घटना मेर जीवन क सबसे बड गौरव (पीएचडी उपामध) क ठीक
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एक साल बाद, 27 मदसंबर 2019 को हुई। मरा मपता जी का बचपन म स्वग ष
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मसधारना मर जीवन की पहली बडी चुनौती थी, तो माताजी का जाना, मेर जीवन
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की सबस बडी और अपूरणीय क्षमत थी।)
एक साल बाद की शांमत में अचानक का शोर
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मदसंबर 2019, बरदु गााँव: बरदु गााँव म अब एक नई शांमत थी। मपछल े
साल, 21 मदसंबर 2018 को, जब मैं पीएचडी की उपामध लेकर लौटा था, तो
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इसी गााँव म उत्सव का माहौल था। माताजी (कशर बाई ठाकुर) की आखों म ें
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उस मदन जो संतोर् और गव मने देखा था, वह मरी सबस बडी पूंजी थी। एक
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साल बाद, हम सभी भाई-बहन अपने-अपने जीवन में व्यवमस्थत थे, और सब
कुछ सामान्य चल रहा था। माताजी अपनी बढती उम्र क बावजूद, पररवार की
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डोर मज़बूती स संभाल हुए थीं।
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26 मदसंबर 2019, शाम: शाम ढल रही थी। अचानक गााँव से मेर बड े
भाई सज्जन मसंह का फोन आया। उनकी आवाज़ में सामान्य प्रेम नहीं था, बमल्क
एक घबराहट और टूटन थी।
"अनार," उन्होंने लगभग हााँफत हुए कहा, "मााँ की तबीयत बहुत, बहुत
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ज़्यादा ख़राब हो गई है। तुरंत, मबना देर मकए गााँव आ जाओ। सभी बहनों को भी
र्फोन कर दो।"
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