Page 203 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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दाह संस्कार पूरा हुआ। चारों ओर हज़ारों की भीड थी, पर मेर मदल में
एक गहरा सूनापन था।
उस मदन, हम सभी भाइयों और बहनों ने मौन रहकर एक-दूसर स यह
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वादा मकया मक हम माताजी क संस्कारों और उनक िारा मसखाए गए मूल्यों को
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कभी नहीं भूलग।
मर जीवन का यह दुखद अध्याय, मुझ हमशा याद मदलाता रहेगा मक
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मेरी सफलता की कहानी का असली लेखक कौन था। मेरी पीएचडी की उपामध,
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मेरा गौरव, और मेर जीवन की हर उपलमब्ध, उन्हीं की अटूट महनत का फल है।
माताजी का स्वगषवास, मेर मलए जीवन का एक ऐसा मोड था, मजसने
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मुझ और मर भाइयों को यह मसखाया मक हम अब अपने पैरों पर खड होकर,
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एक-दूसर का सहारा बनकर, उनक महान जीवन की मवरासत को आगे बढाना
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है। उनकी स्मृमत मर मलए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है।
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