Page 204 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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सासों की रस्सी और अपनों का कवच
(यह कहानी मेरी आत्मा कथा का वह अध्याय है, जो मुझ जीवन की
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सबसे बडी सच्चाई से पररमचत कराता है—यह मक ज्ञान की उपामध और
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दुमनयावी सफलता क्षमणक है, लमकन पररवार का अटूट प्रेम और मनस्वाथष सवा
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ही जीवन का असली आधार है। यह कहानी सन 2021 में आए कोमवड-19
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महामारी क े मवकराल ऱूप की है, मजसने मुझ अपनी चपेट म ल मलया और
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मजसक चंगुल स म कवल अपने मप्रयजनों क त्याग और संघर् क कारण ही बाहर
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मनकल पाया।)
2021—जब शांमत एक भ्रम थी
वर्ष 2020 में, जब कोमवड-19 महामारी ने देश में दस्तक दी थी, तो हम
सब ने इसे एक बडी चुनौती क ऱूप म देखा था, पर यह अपेक्षाकृत 'नॉमषल' थी।
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लेमकन सन 2021 आते-आते, इस वायरस ने अपना मवकराल ऱूप मदखाना शुऱू
कर मदया। अस्पतालों क बाहर लंबी कतार थीं, ऑक्सीजन की कमी थी, और
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हर मदन अनमगनत लोग हमार बीच से जा रहे थे। चारों ओर भय और अमनमितता
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का माहौल था। मर मन म अपनी माताजी क दुखद मनधन (मदसंबर 2019) की
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यादें अभी भी ताज़ा थीं, और अब यह अदृश्य दानव मफर से मेर पररवार क जीवन
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पर मंडरा रहा था।
मैं अपने घर टोंक खुदष में रहकर, खुद को और अपने पररवार को सुरमक्षत
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रखने की पूरी कोमशश कर रहा था। म अब 'डॉ. अनार मसंह ठाकुर' था, जो मशक्षा
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क क्षेत्र में नवाचार क बार में जानता था, लेमकन इस जैमवक नवाचार (वायरस)
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क सामने मरा सारा ज्ञान अधूरा था।
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अप्रैल 2021 (अनुमामनत): मुझ सबस पहल हल्की-सी बेचैनी और
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बुखार महसूस हुआ। शुरुआत म मने इस सामान्य फ्लू मानकर टालने की कोमशश
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