Page 209 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                     इन दोनों ममहलाओं ने घर को संभालकर मुझ मचंतामुि रखा, मजससे
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              म पूरी तरह स अपने उपचार पर ध्यान कमित कर सका। उनकी सेवा मेर जीवन
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              का वह अनमोल तोहर्फा है, मजसे म कभी नहीं भूल सकता।
                                         जीवन का नया जन्म—अंमतम सत्य
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                     धीर-धीर, डॉ. शलन्ि ठाकुर और डॉ. सोनगरा जी क मवशर्ज्ञ उपचार,
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              और मेर पररवार की मनरंतर सवा क कारण, मेरी सााँसों की मदक्कत कम होने
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              लगी। मेरी सीआरपी का स्तर नीचे आने लगा और मर फफड मफर स मज़बूत
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              होने लगे।
                     मने उस मदन महसूस मकया मक म एक नया जीवन जी रहा ह ाँ।
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                     मैं आज अगर मजन्दा हु तो यह मकसी चमत्कार से कम नहीं है, और
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              इसका पूरा श्रेय मर पररवार और दोस्तों को जाता है।
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                     यह कहानी मरी आत्मकथा का वह अंमतम सत्य है, जो मुझ जीवन भर
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              याद रहेगा:
                  •  पीएचडी की उपामध मेरी शैक्षमणक सफलता थी।
                  •  माताजी का आशीवाषद मेरी संस्काररक पूंजी थी।
                  •  लेमकन कोमवड-19 स मरी मुमि, मेर पररवार और दोस्तों क मनस्वाथष
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                     प्रेम का प्रमाण है।
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                     म डॉ. अनार मसंह ठाकुर ह ाँ, पर मेरा अमस्तत्व मेर भाई सुमेर मसंह, मेर  े
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              भांज सुनील मसंह, मेर साले दीपेन्ि ठाक ु र, मेरी पत्नी सोनू ठाक ु र, मेरी भतीजी
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              लमलता ठाक ु र, और मेर डॉक्टर दोस्त गौक ु ल नागर और साडू भाई शैलन्ि ठाक ु र
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              की अथक सवा और प्राथषनाओं स जुडा हुआ है।
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                     इस संघर् ने मुझ मसखाया मक जीवन का सबस बडा नवाचार, और
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              सबसे बडी सफलता—मानवीय प्रेम और सेवा में है ।
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