Page 206 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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                     म तुरंत मफर स डॉ. गौक ु ल नागर क पास गया। उन्होंने मेरी मस्थमत देखते
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              ही मबना मकसी देरी क कहा:
                     "सर , मुझे मार्फ करना, लमकन अब कोई संदेह नहीं है। तुम्हें कोमवड-
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              19 हो गया है और मस्थमत फफडों तक पहुाँच चुकी है। मैं तुम्हें सलाह देता ह ाँ मक
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              तुम तुरंत मकसी बड और सममपषत कोमवड सटर या मनजी अस्पताल में इलाज
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              करो।"
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                     डॉ. नागर का यह पेशवर और साहमसक मनणय मरी मज़ंदगी बचाने की
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              पहली कडी था। उन्होंने दोस्ती स ऊपर उठकर मुझ सही मदशा मदखाई।
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                                       इंदौर की भाग-दौड और देवास का भरोसा
                     2021 का वह भयानक मदन: मेर मलए एक पल भी बबाषद करने का
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                                                        े
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              समय नहीं था। इस दुख की घडी म, मर सबस भरोसमंद साथी, मेरा छोटा भाई
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              सुमेर मसंह ठाक ु र, तुरंत मर साथ खडा हो गया। सुमर ने न तो डर मदखाया और न
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              ही घबराहट। उसका चेहरा एक सैमनक की तरह दृढ था।
                     हमने तुरंत इंदौर क े मेदांता अस्पताल क मलए प्रस्थान मकया, जहााँ हमने
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              तत्काल मसटी स्कन (HRCT) कराया। मसटी स्कन की ररपोट ने डॉ. नागर क
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              मनदान की पुमि कर दी—मेर फफडों म संक्रमण फल चुका था। इंदौर क उस भाग-
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              दौड भर माहौल में, जहााँ हर कोई अपने जीवन क मलए लड रहा था, मुझ अपने
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              भाई सुमर की उपमस्थमत म एक अजीब सुरक्षा महसूस हो रही थी।
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                     अब सवाल था मक इलाज कहााँ मकया जाए। बड शहर क अस्पताल में
              दामखला लना एक चुनौती थी, और वहााँ की भीड और अव्यवस्था से मन घबरा
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              रहा था।
                     हमने तय मकया मक हम देवास जाएाँगे, जहााँ मेर साडू भाई भी लगते हैं—
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              डॉ. शैलन्ि ठाक ु र का मनजी अस्पताल था। यह मनणषय मेर मलए एक भावनात्मक
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