Page 202 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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सादगीपूण जीवन म गााँव क कई लोगों की मदद की थी और उन्हें अपनी ममता
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दी थी।
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शाम तक, हमार घर क बाहर और गााँव की गमलयों में लोगों का हज़ारों
का सैलाब जमा हो चुका था। हमने कभी सोचा नहीं था मक एक मकसान पररवार
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की साधारण ममहला क अंमतम संस्कार म इतने लोग शाममल होंग।
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हमार ररश्तेदार दूर-दूर स आए थे। व लोग भी आए थे, मजन्हें माताजी ने
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कभी मकसी ऱूप म मदद की थी। मर पीएचडी समारोह म शाममल हुए मर प्यार े
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दोस्त—सुरन्ि सन्धव और सोहन क ु मार भैसमनया गोक ु ल नागर आमद —भी दुख
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की इस घडी म अपनी सारी व्यस्तता छोडकर पहुाँच गए थे।
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मर दोस्त सुरन्ि ने मरा हाथ कसकर पकडा और बस इतना कहा,
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"आपकी मााँ हमारी भी मााँ थीं। इस दुख म हम तुम्हार साथ हैं।"
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यह देखकर हम बहुत माममषक संतोर् ममला। यह भीड, यह समथषन, यह
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प्रेम—यह इस बात का प्रमाण था मक मेरी माताजी का जीवन मकतना साथषक था।
उनका असली धन-दौलत उनकी यह सादगी और लोगों का यह अटूट मवश्वास
था।
अंमतम मवदाई और मवरासत का संकल्प
27 मदसंबर 2019: मदन, माताजी की अंमतम यात्रा शुऱू हुई। हज़ारों
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लोगों क बीच, उनक पामथषव शरीर को श्मशान घाट ले जाया गया। हम सभी भाई
क ं धा मदए हुए थे।
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जब दाह संस्कार हो रहा था, तो मैंने देखा मक आग की लपट आसमान
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की ओर उठ रही थीं। उन लपटों म मुझ मरी माताजी का पूरा जीवन मदखाई
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मदया—उनका त्याग, उनकी दृढता, उनका अटूट मवश्वास और उनका संघर्।
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