Page 197 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
मसंह रसोई की व्यवस्था में लगे थे, और क ु मेर मसंह ने बैंड वालों से बात की थी।
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यह उनकी संयुि पररयोजना थी, जो मेर मलए उनक मनस्वाथष प्रेम का प्रमाण थी।
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मेर दोस्त सुरन्ि और सोहन, इस पाररवाररक एकजुटता को देखकर दंग
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थे। उन्होंने महसूस मकया मक यह सफलता कवल मरी नहीं, बमल्क मेर पररवार
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की थी।
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रात में, जब सभी महमान मवदा हो गए और घर म शांमत छाई, तब मैंने
अपने भाइयों और दोस्तों को गले लगाया। मेरी आाँखों में आभार था, मजसे मैं
शब्दों में बयााँ नहीं कर सकता था।
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21 मदसंबर 2018 का वह मदन—जब मैं एक डॉक्टर क ऱूप में अपने
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गााँव लौटा—मेर जीवन का सबसे यादगार मदन है। यह मदन मुझ हमशा याद
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मदलाएगा मक बडी-बडी मडमग्रयााँ और सम्मान तभी अथषपूण होते हैं, जब उन्हें
अपने पररवार और अपनी जडों क प्रेम में सराबोर कर मदया जाए। मेरी आत्मकथा
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का यह पृष्ठ, मेर मलए बरदु गााँव क प्रेम का घोर्णापत्र है।
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