Page 194 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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              बडी उपलमब्ध अकले तुम्हारी नहीं, पूर गााँव की है। और गााँव की उपलमब्ध का
              स्वागत सादगी से नहीं हो सकता।"
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                     तब मुझ पूरी योजना समझ म आई। जब म मदल्ली और अमृतसर म था,
                                                      ैं
                                            ें
                                                                         ें
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              मेर पााँचों भाइयों—सज्जन मसंह, मवक्रम मसंह, गजराज मसंह, मानमसंह, और क ु मेर
              मसंह—ने ममलकर इस भव्य स्वागत समारोह की योजना बनाई थी। उन्होंने रातों-
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              रात गााँव म संदेश मभजवाया, दूर-दराज क ररश्तेदारों और सभी दोस्तों को
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              आमंमत्रत मकया।
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                     हमारा घर, मजस हम शांत और थका हुआ मान रहे थे, आज मकसी
              उत्सव क मलए दुल्हन की तरह सजाया गया था। दरवाज़ पर हार-फूल की लटकनें
                                                         े
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                                         ाँ
              थीं, और चारों ओर रंगीन पताकाए लगी थीं।
                                      डॉक्टर का जुलूस—सम्मान की माला

                                                                          मेर  े
                                                             दोस्तों—सुरन्ि और
                                                                      े
                                                             सोहन—का  चेहरा
                                                             भी  मवस्मय  और

                                                                    े
                                                             आनंद  स  भरा  था।
                                                             उन्होंने    कभी

                                                             कल्पना नहीं की थी
                                                             मक  एक  शैक्षमणक

              उपामध का स्वागत इस तरह से होता है।
                                                                      े
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                     सुरन्ि सन्धव ने धीर स कहा, "यार अनार सर , मदल्ली क दीक्षांत
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                                      े
              समारोह से ज़्यादा भव्य नज़ारा तो आपक गााँव में है!"
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