Page 211 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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ऑनलाइन टूल्स क मलए प्रमशमक्षत मकया, बमल्क दूर-दराज क क्षेत्रों में रहने वाले
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मवनॏयामथषयों को भी वचुअल क्लासऱूम स जोडा।
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चुनौमतयां और संघर्ष
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ग्रामीण क्षत्रों म इंटरनेट की कमी और बच्चों क पास स्माटफोन न होना
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एक बडी बाधा थी। लमकन डॉ. ठाकुर की दूरदमशता ने यहााँ भी समाधान
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मनकाला। उन्होंने ररकॉडड लेक्चसष, इंटरमक्टव मक्वज़ और व्हाट्सएप ग्रुप्स क
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माध्यम से मशक्षा को 'डोर-स्टप' (दरवाज तक) पहुाँचाया। उनकी ऑनलाइन
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कक्षाएं कवल मकताबी ज्ञान तक सीममत नहीं थीं, बमल्क वे महामारी क दौरान
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बच्चों क मानमसक स्वास्थ्य और मनोबल को बढाने का काम भी कर रही थीं।
अंतराषष्रीय स्तर पर ममली पहचान: एमशयन एजुकशन अवाड ष
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मशक्षा क प्रमत उनक इसी मनस्वाथष जज्बे और 'मडमजटल क्रांमत' को
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अंतराषष्रीय मंच पर पहचाना गया। वर् 2021 में उन्हें प्रमतमष्ठत 'एमशयन एजुकशन
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अवाड' से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें महामारी क दौरान ऑनलाइन मशक्षा
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क माध्यम स बच्चों तक मनरंतर पहुाँच बनाए रखने और शक्षमणक नवाचार
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(Educational Innovation) क मलए प्रदान मकया गया।
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यह पुरस्कार इस बात का प्रमाण था मक एक मशक्षक की दृमि कवल
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कक्षा की दीवारों तक सीममत नहीं होती, वह समय और तकनीक क साथ
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बदलकर पूर समाज का पथ प्रदशन कर सकता है।
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एक योद्ा की दोहरी जीत
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डॉ. अनार मसंह ठाकुर क मलए 2021 का साल दोहरी परीक्षा का था।
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एक तरफ व स्वयं कोमवड-19 क मवरुद् अपनी सााँसों की जंग लड रहे थे, और
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दूसरी तरफ व समाज को अज्ञानता क अंधकार स बचाने क मलए ऑनलाइन
मशक्षा का दीया जला रहे थे।
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