Page 44 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                     इस आत्मकथा क माध्यम से, मैं श्री कन्हैयालाल शमाष जी का हृदय से
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                                                                ष
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              आभार व्यि करना चाहता ह ाँ। व हमार पररवार क मलए मसर्फ एक ममत्र नहीं,
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              बमल्क एक मागषदशषक, एक शुभमचंतक और एक फररश्ता थे। उनकी वजह स   े
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              हमार पररवार ने न कवल आमथषक मस्थरता हामसल की, बमल्क समाज में भी एक
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              पहचान बनाई। उनकी दी हुई महम्मत और उनका मवश्वास मर जीवन की सबस  े
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              बडी दौलत है। उनका योगदान शब्दों म बयां नहीं मकया जा सकता, लेमकन मैं
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              हमशा उनक इस उपकार का ऋणी रह ाँगा।
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                "दोस्त वही जो अंधेरों म मिाल बनकर आए, िमाा जी वो िख्स
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                थे, जजनहोंन गगरत हए को सभलना ससखाया।"
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                "ससर् सलाह नहीं दी उनहोंन, सपनों को हकीकत का आधार ददया,
                हमारी तरक्की की इमारत को, उनहोंने अपने ववश्वास का ववस्तार
                ददया।"

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                "ररश्त खून क ही नही, ववश्वास क भी अनमोल होते ह, क ु छ इसान
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                दुननया म, ईश्वर क भजे हए 'दूत' होते ह।"
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                "आज जो लहलहाती र्सल ह और ससर पर पक्की छत ह, य सब
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                                          ैं
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                उनही की दूरदृजटि और ननिःस्वाथा प्रम की बरकत ह।"

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