Page 48 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                     मेर 79 प्रमतशत अंक आए थे। यह एक बहुत अच्छा स्कोर था। मुझ  े
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              खुशी होनी चामहए थी, लमकन मरा मदल टूट गया क्योंमक इतने अच्छ अंक लाने
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              क बाद भी मरा चयन नहीं हुआ। इसका कारण था, आरक्षण। मैं सामान्य श्रेणी
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              (General Category) का छात्र था, और मेर जैसे सामान्य छात्रों क मलए कट-
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              ऑफ बहुत ऊचा था। उसी समय, मुझ यह भी पता चला मक आरमक्षत श्रेणी क
              छात्रों का चयन मात्र 25 प्रमतशत अंकों पर भी हो गया था।
                                                                   े
                     यह मेर जीवन का सबसे बडा और कडवा सच था। यह मेर मलए मसफ
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              एक परीक्षा का पररणाम नहीं था, बमल्क मेर सपनों और मेरी मेहनत पर लगा एक
              सवामलया मनशान था। मने महसूस मकया मक मरी योग्यता और महनत को कवल
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              इसमलए अनदेखा कर मदया गया क्योंमक म एक मवशर् श्रेणी म पैदा हुआ था।
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              यह घटना मेर मलए एक गहरा सदमा थी, मजसने मुझ जीवन क एक कठोर पहलू
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              से पररमचत कराया। उस मदन मेरा मवश्वास महल गया था, लेमकन यह मेर जीवन
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              का टमनिंग पॉइंट था।
                     इस मनराशा ने मुझ तोड नहीं मदया, बमल्क मुझ और मजबूत बनाया।
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              उस क्षण मने तय मकया मक अगर एक रास्ता बंद हुआ है, तो म दूसरा रास्ता
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              खोजूगा। यह असफलता मर मलए एक सबक बनी, मजसने मुझ मसखाया मक
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              जीवन म हर चीज़ हमारी योजना क अनुसार नहीं होती, और कभी-कभी सबसे
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              बडी हार ही सबसे बडी सीख होती है। उस मदन से मैंने अपने जीवन की मदशा
              बदल दी, और एक ऐसे रास्ते पर चला, मजसने मुझ आज यहााँ तक पहुाँचाया है।
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              यह अनुभव हमशा मुझ याद मदलाता है मक चुनौमतयााँ भल ही मकतनी भी बडी
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              हों, उनसे हार नहीं माननी चामहए।

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