Page 53 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                     उच्च मशक्षा का सफर: पी.जी. महामवनॏयालय मसहोर

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                                                                  े
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                     आइसक्ट संस्था म क ं प्यूटर प्रमशक्षण क साथ-साथ, मेर मन में उच्च
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                                                                         े
              मशक्षा प्राप्त करने की ललक भी उतनी ही तीव्र थी। मैं जानता था मक कवल
              तकनीकी ज्ञान ही काफी नहीं है, बमल्क एक मजबूत शमक्षक पृष्ठभूमम भी बहुत
                                                          ै
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              ज़ऱूरी है। इसी मवचार क साथ, सन 1993 में मैंने पी.जी. महामवनॏयालय मसहोर में
              बचलर ऑफ आट्षस म प्रवश मलया। यह मर मलए एक दोहरी चुनौती थी—एक
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              तरफ क ं प्यूटर का तकनीकी प्रमशक्षण और दूसरी तरफ कला संकाय की पढाई।
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              लमकन मने दोनों को एक साथ संभालने का फसला मकया।
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                                                                   ै
                     मसहोर म मर ये साल ज्ञान और अनुभव का एक संगम थे। बचलर ऑफ
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              आट्षस की पढाई ने मर सोचने और समझने क तरीक को और भी व्यापक बनाया।
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                                                                मैंने  इमतहास,
                                                                     राजनीमत
                                                                मवज्ञान  और
                                                                अन्य    कला
                                                                मवर्यों स बहुत
                                                                        े
                                                                कुछ  सीखा।
                                                                जहााँ  क ं प्यूटर
                                                                प्रमशक्षण ने मुझ  े
                                                                      े
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              आधुमनक तकनीकी दुमनया स जोडा, वहीं कला संकाय की पढाई ने मुझ समाज,
              इमतहास और मानव व्यवहार की गहरी समझ दी। यह एक ऐसा संतुलन था मजसने
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              मर व्यमित्व को बहुआयामी बनाया।
                     मरा शमक्षक सफर यहााँ रुका नहीं। बचलर ऑफ आट्षस पूरा करने क
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              बाद, मैंने अपने ज्ञान को और गहरा करने का फसला मकया और मास्टर ऑफ
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