Page 49 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                                  AISECT: एक नई शुरुआत


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                                                                   े
                     (आल इंमडया सोसायटी फॉर इलक्रॉमनक्स एवं क ं प्यूटर टक्नोलोजी)
                     सन् 1992 में ममली मनराशा ने मेर जीवन को एक अमनमित मोड पर
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                                                             े
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              लाकर खडा कर मदया था। इंजीमनयररंग म प्रवश न ममलने क बाद मरा मन बहुत
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              उदास था, और भमवष्य की राह धुंधली लग रही थी। मर सपनों को जस पंख
                                                                         े
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              ममलने से पहले ही काट मदया गया था। मैं अपने आप से बार-बार यही सवाल
              पूछता था मक अब आग क्या? इसी दौरान मैं अक्सर ‘रोजगार समाचार’ (रोजगार
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              समाचार) पढता था, यह उम्मीद मलए मक शायद कोई नई राह मदख जाए।
                     और सच में,सन 1993 में एक मदन उस रोज़गार समाचार में एक छोटा
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              सा मवज्ञापन मेर मलए उम्मीद की एक नई मकरण बनकर सामने आया। यह
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              मवज्ञापन भोपाल की एक संस्था, ‘AISECT’  का था, जो क ं प्यूटर म मडप्लोमा
              कराती थी। उस समय क ं प्यूटर का ज्ञान बहुत नया और आधुमनक माना जाता

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              था। मर मन म यह मवचार आया मक क्यों न इस नई दुमनया म कदम रखा जाए?
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                                                          मबना  ज़्यादा  सोचे-
                                                                    ैं
                                                          समझे,  मने  तुरंत
                                                          आवदन कर मदया। मुझ  े
                                                              े
                                                          नहीं  पता  था  मक  यह
                                                          एक  ऐसा  मनणषय  होगा

                                                          जो मर जीवन की पूरी
                                                               े
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                                                          मदशा बदल देगा।
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                     कुछ मदनों बाद, मेर पास साक्षात्कार (interview) क मलए एक कॉल
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              लटर आया। उस लटर को देखकर मर मन म वही पुराना उत्साह और उम्मीद
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              लौट आई जो इंजीमनयररंग की परीक्षा स पहल थी। साक्षात्कार क मलए म पूरी
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