Page 45 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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टोंक खुदष क यादगार पल: दोस्ती और छात्र राजनीमत
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टोंक खुदष म अपनी हाई एवं हायर सकडरी की पढाई क दौरान, मेरा
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जीवन कवल मकताबों तक सीममत नहीं था, बमल्क वह दोस्ती, नए अनुभवों और
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छात्र राजनीमत क रोमांच स भी भरा हुआ था। गााँव स मनकलकर एक नए शहर
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में रहना मेर मलए एक बडा बदलाव था, और इस बदलाव में मेर जीवन को
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संवारने म मर दोस्तों का बहुत बडा हाथ रहा।
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मेर साथ एक ही कमर में रहने वाले मनोहर मसंह वकील, मसफ मेर े
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ऱूममेट नहीं,
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बमल्क मेर सबसे
पहले दोस्त थे।
उनक साथ मबताए
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गए मदन, हमारी
साझा की गई
कहामनयााँ, और
एक साथ की गई
पढाई ने उस नए माहौल में मेर मलए एक घर जैसा एहसास पैदा कर मदया। हम
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दोनों ने एक-दूसर क साथ सुख-दुुःख बााँट और मुमश्कल समय म एक-दूसर का
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सहारा बने।
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टोंक खुदष म मरा दोस्तों का एक खास समूह था। सोराब पटल, हनीफ
पटल, अफसर पटल, और सुरश पटल जस दोस्त मर जीवन क इस महत्वपूण ष
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चरण में मेर साथ थे। हम सब एक साथ पढाई करते थे, खेलते थे, और एक-दूसर े
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क साथ अपनी बातें साझा करते थे। हमारी दोस्ती इतनी गहरी थी मक हर पल
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यादगार बन जाता था।
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