Page 46 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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                     इन्हीं मदनों, हमार स्कूल म छात्र राजनीमत का भी एक रोमांचक दौर चल
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                                                                         े
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              रहा था। स्कूल क छात्र पररर्द् क चुनाव होने वाल थे, और हमार मलए यह कवल
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                                                                े
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              एक चुनाव नहीं, बमल्क हमारी एकजुटता और नेतृत्व का एक बडा इमम्तहान था।
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              हमार समूह म स सोराब पटल ने अध्यक्ष पद क मलए चुनाव लडा। हम सब ने
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              ममलकर उनका पूरा साथ मदया। दीवारों पर पोस्टर लगाना, नार लगाना, और वोट
              क मलए दोस्तों से बात करना, यह सब हमार मलए एक नया और जोश से भरा
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              अनुभव था।
                     आमखरकार, मतगणना का मदन आया और पररणाम घोमर्त हुआ। जब
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              यह घोर्णा हुई मक सोराब पटल छात्र पररर्द् क अध्यक्ष चुन मलए गए हैं, तो
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              हमारी खुशी का कोई मठकाना नहीं था। हम सबने ममलकर जीत का जश्न मनाया।
              यह जीत मसफ सोराब की नहीं, बमल्क हम सब दोस्तों की दोस्ती, मेहनत और
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              मवश्वास की जीत थी। इस घटना ने मुझ यह मसखाया मक संगमठत होकर और एक
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              साथ ममलकर मकसी भी लक्ष्य को हामसल मकया जा सकता है।
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                     टोंक खुदष म मबताए व साल मर शमक्षक सफर का एक महत्वपूण   ष
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              अध्याय हैं। ये वह समय था जब मैंने सच्ची दोस्ती का मतलब समझा और यह
              जाना मक कस संघर् और उत्साह स भर जीवन म एक-दूसर का साथ ममलना
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              मकतना ज़ऱूरी है।

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