Page 52 - आनंद से अनार तक
P. 52

आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
                                                 े

                                                                        ष
              रहने, खाने-पीने और पढाई का सारा खचष उन्होंने ही उठाया। मेर पास मसफ एक
                                                                े
              ही काम था ,मन लगाकर पढाई करना और उनक त्याग को व्यथष न जाने देना।
                                                    े
                                                           े
                           े
                     यह मेर जीवन का एक ऐसा मोड था, जहााँ मुझ यह एहसास हुआ मक
                                                                     े
              पररवार का सहारा मकतना महत्वपूण होता है। जब चारों तरफ स रास्त बंद होत  े
                                           ष
                                                                 े
                             े
              मदख रहे थे, तब मर पररवार का अटूट मवश्वास और समथषन ही मर मलए उम्मीद
                             े
                                                                 े
                                                                  े
              की आमखरी मकरण बना। यह प्रमशक्षण मसफ क ं प्यूटर मडप्लोमा नहीं था, बमल्क
                                                 ष
                        े
                                      े
                                       े
               े
                े
              मर पररवार क बमलदान और मर दृढ संकल्प का प्रतीक था।
                               ैं
                                                        े
                     आज जब म पीछ मुडकर देखता ह ाँ, तो मुझ अपने भाई और माताजी
                                   े
              क त्याग पर बहुत गव होता है। उन्होंने मुझ कवल आमथषक सहायता ही नहीं दी,
                                                 े
                                               े
               े
                               ष
                                                   े
                                              ें
                       े
              बमल्क मुझ यह मसखाया मक जीवन म सबस बडी दौलत पैसा नहीं, बमल्क
                                         े
                                                                       े
                                       े
              पररवार का प्यार और एक-दूसर क प्रमत समपषण होता है। यह अनुभव मर जीवन
                                                                      े
              की सबस बडी सीख है और म हमशा उनक प्रमत कृतज्ञ रह ाँगा।
                                                े
                                      ैं
                      े
                                         े



                     ================================







              42 | P a g e
   47   48   49   50   51   52   53   54   55   56   57