Page 56 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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चौब जी ने मुझ बताया मक तकनीकी मशक्षा कवल नौकरी पाने का
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ज़ररया नहीं है, बमल्क यह एक ऐसा साधन है मजसस हम समाज और खुद क
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मलए कुछ नया कर सकत हैं। उन्होंने तकनीकी ज्ञान को एक उनॏयमी बनने की
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प्रेरणा क साथ जोडा। उनकी यह सोच मर मलए मबल्कुल नई थी। जहााँ तक म ैं
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सोच रहा था मक मुझ नौकरी ममल जाए, वहीं उन्होंने मुझ यह सोचने पर मजबूर
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कर मदया मक म खुद एक ऐसा काम शुऱू कर सकता ह ाँ जो दूसरों क मलए रोज़गार
क अवसर पैदा कर।
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उन्होंने मुझ समझाया मक एक उनॏयमी वह होता है जो चुनौमतयों को
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अवसरों म बदलता है। उनक मागदशन स मुझ यह एहसास हुआ मक मर पास भी
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वह क्षमता है, मजसस म तकनीकी क क्षत्र म एक नया उनॏयमी बन सकता ह ाँ। म ैं
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हमशा स ही चुनौमतयों का सामना करने वाला व्यमि रहा ह ाँ, लेमकन चौबे जी ने
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मर अंदर मछपी उस उनॏयमी की भावना को जगाया।
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आज म बड गव क साथ यह कहता ह ाँ मक श्री संतोर् चौब जी मर े
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आदश हैं। उनका दूरदशी दृमिकोण, उनका समपषण और उनका लोगों को सशि
बनाने का जुनून, हमेशा मेर मलए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनकी प्रेरणा से ही मैंने
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अपने जीवन की मदशा को एक नया मोड मदया और यह मवश्वास मकया मक एक
साधारण पृष्ठभूमम का व्यमि भी अपने सपनों को पूरा कर सकता है। उनस े
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मुलाकात ने मुझ कवल तकनीकी ज्ञान नहीं मदया, बमल्क जीवन में सफल होने
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का मंत्र भी मदया।
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