Page 61 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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                                 कॉलज क मदन: एक दखद घटना
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                     ( मदनाक 9  माचष 1995 समय प्रातुः 9  बजे )
                     कॉलेज का दौर मेर जीवन का सबसे समक्रय और ऊजाषवान समय था।
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              मसहोर में, जहााँ मैं पढ रहा था, दो प्रमुख महामवनॏयालय थे: पी.जी. महामवनॏयालय

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                                                                       े
              मसहोर और आर.ए.क. महामवनॏयालय मसहोर। इन दोनों महामवनॏयालयों क छात्रों
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              क बीच आपसी संबंध कभी बहुत अच्छ नहीं रहे, और अक्सर छोटी-मोटी बातों
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              पर तनाव बना रहता था। इसी माहौल में, हम एक बडी सुमवधा ममली हुई थी—
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              इंदौर स भोपाल की ओर चलने वाली बॉम्बे रवल्स की बसों में सभी मवनॏयामथषयों
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              का आना-जाना मुफ्त था। यह सुमवधा हम सभी छात्रों क मलए एक बडी राहत
              थी।
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                     परंतु, एक मदन इस शांमतपूण व्यवस्था म एक दुभाषग्यपूण घटना ने दरार
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              डाल दी। बॉम्ब रवल्स की एक बस क क ं डक्टर ने एक छात्र, ममलन शमाष, से पैसे
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                                                        ले  मलए,  जबमक  वह
                                                        आर.ए.क.  महामवनॏयालय
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                                                        का  छात्र  था  और  मुफ्त
                                                        यात्रा का हकदार था। यह

                                                        घटना  एक  मचंगारी  की
                                                        तरह थी, मजसने पहले से

              ही तनावपूण माहौल म आग लगा दी।
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                     इस बात की खबर ममलते ही, आर.ए.क. महामवनॏयालय क छात्रों का
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              गुस्सा भडक उठा। उन्होंने अपनी ताकत मदखाने का फसला मकया, लेमकन उनका
              तरीका सही नहीं था। उन्होंने एकजुट होकर इंदौर स भोपाल जाने वाली सभी
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              बसों को बीच रास्ते में ही रोक मदया। देखते ही देखत, हालात बकाबू हो गए।
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