Page 66 - आनंद से अनार तक
P. 66

आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
                                                 े

                                                                े
                                      े
                                       े
                                            ें
                     वह ररश्ता आज भी मर मन म मज़ंदा है। यह कहानी मुझ मसखाती है मक
                                           ष
              सच्चा ररश्ता वह नहीं होता जो मसर्फ मववाह तक जाए, बमल्क वह होता है जो
                                           े
              सम्मान, समझदारी और सच्चाई स भरा हो। सोनू और मने एक-दूसर को जो
                                                             ैं
                                                                      े
              मदया, वह मकसी भी ररश्ते से कहीं ज़्यादा था।
              ===========================================


                "मोहब्बत का अथा कवल साथ पाना नहीं होता, कभी-कभी अपनों
                                  े
                 े
                क मान क सलए उसे त्यागना ही सबसे बड़ा प्रेम होता ह।"
                                                                 ै
                        े


                "ऩिरों की वो खामोि गुफ्तगू, िब्दों से कहीं गहरी थी, वो ससहोर
                की गसलयाँ और 8 जुलाई की तारीख, आज भी यादों म ठहरी थी।"
                                                               ें



                "ददल की बात कहना साहस था उसका, पर सच बताना धमा था
                                        ें
                मेरा, ररश्तों की किमकि म भी, संस्कारों का ही रहा हमेिा
                बसेरा।"


                "जुदा हए रास्त, बदल गईं मंज़िल, पर यादों का कारवां साथ रहा,
                             े
                                             ें
                      ु
                                                                 ें
                वो ररश्ता कागजों पर स्याही बनकर, सालों साल 'खतों' म ज़िंदा
                रहा।"






              56 | P a g e
   61   62   63   64   65   66   67   68   69   70   71