Page 67 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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आभार: मेर तकनीकी सफर क मागषदशषक
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जीवन का कोई भी सफर, चाहे वह मकतना भी छोटा हो, मबना सही मागषदशषन क
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पूरा नहीं हो सकता। मर मलए भी आइसक्ट संस्थान म क ं प्यूटर प्रमशक्षण का सफर
कुछ ऐसा ही था। यह वह समय था जब म एक नई मदशा की तलाश म था और
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मुझ कुछ ऐस मशक्षक ममल, मजन्होंने मर अंदर मछपी हुई संभावनाओं को पहचाना
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और उन्हें साकार करने म मदद की। यह लख उन सभी मशक्षकों और संस्था क
प्रमत मेरा हृदय से आभार है, मजन्होंने मेर जीवन को एक नया आयाम मदया।
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आइसक्ट म मरी मुलाकात दो ऐस महान मशक्षकों स हुई, मजन्होंने मेर तकनीकी
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ज्ञान की नींव रखी: श्री फहीम खान और सुश्री उमा शमाष। उस दौर म क ं प्यूटर का
ज्ञान बहुत नया और तकनीकी था, लमकन इन दोनों मशक्षकों ने अपने कुशल
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और सरल तरीक स इस हमार मलए बहुत आसान बना मदया। श्री फहीम खान
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और सुश्री उमा शमाष ने
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हम मसफ पाठ्यक्रम नहीं
पढाया, बमल्क हमें हर
मवर्य की बारीमकयों को
समझाया। उन्होंने हमें
क ं प्यूटर का पररचय,
डॉस, बमसक प्रोग्राममंग,
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कोबोल, और सी++
जसी जमटल भार्ाओं को
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इतने कुशलतापूवक
मसखाया मक आज भी उनका पढाया हुआ हर मवर्य मर ज़हन म ताज़ा है।
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