Page 62 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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छात्रों ने बसों में तोड-फोड करना शुऱू कर मदया। उनक इस अराजक व्यवहार ने
एक बडी समस्या खडी कर दी।
इस घटना क कारण लगभग 5 से 6 घंट तक इंदौर-भोपाल रोड पर
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यातायात पूरी तरह स ठप रहा। बसों म सवार सकडों यात्री, मजनमें ममहलाएाँ,
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बच्चे, बुजुग और बीमार लोग भी थे, बहुत परशान हुए। उनका कोई कसूर नहीं
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था, मफर भी उन्हें छात्रों क गुस्स और मनमानी का खाममयाजा भुगतना पडा।
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सडक जाम हो गई ं , और हर तरफ हाहाकार मच गया।
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यह सब देखकर मरा मन बहुत दुखी हुआ। मने महसूस मकया मक जहााँ
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छात्रों की शमि का उपयोग सकारात्मक बदलाव क मलए मकया जाना चामहए
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था, वहााँ उसका दुरुपयोग मकया गया। एक छात्र क साथ हुई नाइंसाफी का बदला
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लने क मलए बकसूर आम जनता को परशान करना मबल्कु ल भी सही नहीं था।
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उस मदन मुझ यह एहसास हुआ मक जब हम अपने हक की लडाई लडत हैं, तो
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हम यह ध्यान रखना चामहए मक हमारा संघर् दूसरों क मलए परशानी का सबब
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न बने। यह घटना मेर मन में एक गहरी छाप छोड गई, मजसने मुझ हमशा यह
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मसखाया मक गुस्स म आकर महंसा का रास्ता चुनना कभी भी सही नहीं होता।
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