Page 59 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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                          कॉलज क मदन: दोस्ती, संघर्ष और इंसामनयत
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                     ( मदनाक 12 फरवरी 1995 समय मदन क 3 बजे )
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                     कॉलेज का समय कवल मकताबों और परीक्षा तक सीममत नहीं होता,
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              बमल्क वह जीवन क सबसे गहर सबक मसखाने वाला भी होता है। मेर मलए,
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                                                                       े
              मसहोर म मबताए व मदन दोस्ती और इंसामनयत की एक ऐसी कहानी क गवाह
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                                                                       े
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              बने, मजस म कभी नहीं भूल सकता। मरी पढाई क दौरान, मर दो बहुत ही करीबी
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              दोस्त थे, प्रकाश बवेररया और पीटर बवेररया, जो झाबुआ मजल क राणापुर स  े
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              थे। हमारी दोस्ती इतनी गहरी थी मक हम एक-दूसर क सुख-दुुःख म हमशा साथ
              रहते थे।
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                     एक मदन, हमार मलए एक ऐसी चुनौती आई मजसने हमारी दोस्ती और
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                                                            ली।  प्रकाश  बवेररया
                                                            की अचानक तबीयत
                                                            बहुत  खराब  हो  गई।
                                                            उसकी हालत देखकर
                                                            हम  सब  घबरा  गए
                                                            और  मबना  समय
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              गंवाए उस तुरंत मसहोर क मजला अस्पताल ल गए। वहााँ क डॉक्टरों ने जााँच क
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              बाद बताया मक उसे एपेंमडसाइमटस है और उस तुरंत ऑपरशन की ज़ऱूरत है।
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              यह बात सुनकर हम सब क पैरों तल ज़मीन मखसक गई।
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                     डॉक्टर की बात ने हमार सामने एक बडी समस्या खडी कर दी। हमार  े
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              पास ऑपरशन कराने क मलए पयाषप्त पैसे नहीं थे। हम कॉलेज क छात्र थे और
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              हमारी आमथषक मस्थमत ऐसी नहीं थी मक हम इतना बडा खचष उठा सक। हम तीनों
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