Page 74 - आनंद से अनार तक
P. 74
आत्मकथा -आनंद स अनार तक
े
गुरुक ु ल मशक्षा मवकास समममत का गठन:
एक सामूमहक संकल्प
े
सन् 1992 में ममली मनराशा और उसक बाद 1998 में आइसेक्ट क
े
े
सममनार म ममली प्रेरणा ने मर जीवन को एक नई मदशा दी थी। श्री संतोर् चौब े
ें
े
े
जी क मवचारों से
े
प्रेररत होकर मैंने यह
मनिय कर मलया था
े
मक मुझ भी अपने
जीवन को ग्रामीण
ें
अंचल म तकनीकी
े
मशक्षा क प्रसार क
े
ममशन से जोडना है।
लेमकन मैं जानता था
मक इतना बडा लक्ष्य
े
अकले हामसल नहीं
े
मकया जा सकता। इसक मलए मुझ कुछ ऐस सामथयों की ज़ऱूरत थी जो मर सपने
े
े
े
े
ें
को अपना सपना बना सक।
ैं
मदनांक 25 मई, 1998 को, मने अपने कुछ करीबी दोस्तों और हम
ें
े
े
े
े
मवचारों वाल मशक्षामवदों को एक साथ बुलाया। उस बठक म मर साथ मर भाई
े
ै
सुमेर मसंह और क ु मेर मसंह, मेर ममत्र राज भंवर ठाक ु र, शैलेन्ि राठौर और कुछ
े
अन्य लोग मौजूद थे। हमने एक साथ बठकर लंबी चचाष की और यह मवचार
ै
मकया मक कस हम अपने ग्रामीण क्षत्र म मशक्षा की कमी को दूर कर सकत हैं।
े
े
े
ें
ै
े
ें
हमने महसूस मकया मक हमार क्षत्र म, जहााँ मशक्षा की दर कम है, वहााँ एक ऐसी
े
64 | P a g e

