Page 78 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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मशवम इंस्टीट्यूट का शुभारंभ: एक सपन का साकार होना
(15 जुलाई, 1998)
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सन् 1998 में, जब मने आइसक्ट सममनार म श्री संतोर् चौब जी क
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मवचारों स प्रेरणा लकर ग्रामीण अंचल म तकनीकी मशक्षा का अलख जगाने का
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संकल्प मलया, तो मुझ यह एहसास हुआ मक यह कवल एक सपना नहीं, बमल्क
एक ममशन था। इसी ममशन को साकार करने क मलए, मने और मर कुछ सामथयों
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ने ममलकर गुरुक ु ल मशक्षा मवकास समममत का गठन मकया था। उस समममत क
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गठन क कुछ ही समय बाद, हम अपने संकल्प को हकीकत म बदलने क मलए
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तैयार थे।
आमखरकार वह ऐमतहामसक मदन आ ही गया। 15 जुलाई, 1998 को,
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हमने टोंकखुदष क
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पदेमशपुरा म अपने
पहले मशक्षण
संस्थान, "मशवम
इंस्टीट्यूट
आइसेक्ट" की
शाखा का शुभारंभ
मकया। यह मसफ एक मबमल्डंग का उद्घाटन नहीं था, बमल्क एक सपने का साकार
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होना था, एक ऐसे भमवष्य की नींव रखी जा रही थी, जहााँ ग्रामीण युवाओं को
भी तकनीकी मशक्षा का अवसर ममल सक।
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संस्थान क शुभारंभ का कायषक्रम बहुत ही भव्य था। इस शुभ अवसर
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पर, हम कुछ ऐस महानुभावों का आशीवाषद ममला, मजनका सम्मान हमार समाज
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म बहुत अमधक था। हमार मुख्य अमतमथ श्री हरी मसंह क ु शवाह, जो उस समय
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