Page 82 - आनंद से अनार तक
P. 82

े
                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

              संकट में संबल —


                     एक मानवीय सौदा और दआओं का मनवेश
                                               ु
                                       े
                                                          ें
                     जीवन की साथषकता कवल स्वयं क उत्थान म नहीं, बमल्क मगरत हुए
                                                 े
                                                                         े
              को थामने में है। मेरी आत्मकथा का यह अध्याय वर्ष 2001 की उस घटना पर
                                 े
              आधाररत है, मजसने न कवल मेर धैयष की परीक्षा ली, बमल्क यह भी मसद् मकया
                                        े
              मक 'इंसामनयत' का सौदा मुनाफ स कहीं ऊपर होता है।
                                         े
                                      े
              1. महेश पांचाल की मवकट पररमस्थमत
                                                                            े
                     देवली मनवासी महेश पांचाल, जो तहसील रोड पर एक शोऱूम क
                                         े
                                                        े
              व्यवसायी थे, अचानक मनयमत क चक्र म ऐस फस मक उनका हंसता-खेलता
                                                      ाँ
                                                ें
                                                    े
              व्यवसाय और सम्मान दांव पर लग गया। उन पर बाजार का भारी कज हो गया
                                                                      ष
                                                         े
              था और लोगों की देनदाररयााँ इतनी बढ गई थीं मक उनक पास अपना वह शोऱूम
                         े
              नुमा मकान बचने क अलावा कोई मवकल्प नहीं बचा।
                              े
                     तहसील रोड पर बना वह मकान कवल ई ं ट-पत्थरों का ढांचा नहीं था,
                                                 े
              बमल्क महेश जी की साख का प्रतीक था। जब उन्होंने वह मकान बेचने का
              प्रस्ताव रखा, तो चारों ओर अमनमितता का माहौल था।
              2. वह ऐमतहामसक सौदा और जोमखम भरा मनणषय

                     मवस्तृत चचाष क बाद, वह सौदा 11 लाख 51 हजार रुपये म तय हुआ।
                                                                    ें
                                 े
              लेमकन यह कोई साधारण खरीद-फरोख्त नहीं थी। मकान पर लगभग 6 लाख
                                                              े
              रुपये का बक लोन मरी पूजनीय माताजी क नाम पर था। इसक अमतररि, बाजार
                       ैं
                              े
                                               े
                                                                           े
                                                            े
                                                  े
               े
              क तमाम उन लोगों को पैसा चुकाने की मजम्मदारी भी मुझ अपने क ं धों पर लनी
              पडी, मजनसे महेश जी ने उधार ले रखा था।

              72 | P a g e
   77   78   79   80   81   82   83   84   85   86   87